एफआईएच हॉकी वर्ल्ड कप 2026 से पहले भारतीय हॉकी टीम की नई आधिकारिक जर्सी को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। हॉकी इंडिया ने आगामी विश्व कप के लिए पुरुष और महिला दोनों टीमों की नई प्राथमिक जर्सी का अनावरण किया है, जिसमें पारंपरिक नीले रंग की जगह केसरिया रंग को प्रमुखता दी गई है। इस बदलाव के सामने आते ही खेल जगत और सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई। भारतीय हॉकी टीम वर्षों से नीली जर्सी में खेलती रही है और यही रंग उसकी वैश्विक पहचान बन चुका है। ऐसे में नई जर्सी को लेकर खेल प्रेमियों और पूर्व खिलाड़ियों की प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं।
सबसे तीखी प्रतिक्रिया भारत के पूर्व हॉकी कप्तान और ओलंपियन विरेन रास्किन्हा की ओर से आई। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि भारतीय हॉकी टीम की विरासत और पहचान हमेशा नीले रंग से जुड़ी रही है। उन्होंने लिखा कि उन्होंने कई वर्षों तक गर्व के साथ नीली जर्सी पहनी है और प्रशंसक भी भारतीय टीम को उसी रंग में देखना चाहते हैं। रास्किन्हा ने नई केसरिया जर्सी को लेकर सवाल उठाते हुए इसे “शर्मनाक” बताया और पूछा कि आखिर इस बदलाव के पीछे तर्क क्या है। उनकी टिप्पणी के बाद यह मुद्दा खेल जगत में चर्चा का विषय बन गया।
दूसरी ओर हॉकी इंडिया ने इस फैसले का बचाव किया है। संगठन का कहना है कि नई जर्सी केवल रंग बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, परंपरा और राष्ट्रीय गौरव को प्रदर्शित करने की कोशिश है। हॉकी इंडिया के अनुसार केसरिया रंग साहस, त्याग और विजय का प्रतीक है तथा यह भारतीय तिरंगे से प्रेरित है। जर्सी में मंडला कला से प्रेरित डिज़ाइन, अशोक चक्र की झलक और सुदर्शन चक्र की आधुनिक शैली को भी शामिल किया गया है। इसके अलावा ‘INDIA’ शब्द को देवनागरी लिपि में दर्शाया गया है, ताकि भारत की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता को भी सम्मान दिया जा सके।
हॉकी इंडिया के अधिकारियों का यह भी कहना है कि इस बदलाव के पीछे तकनीकी कारण भी हैं। उनके मुताबिक नीले रंग के हॉकी टर्फ पर यदि खिलाड़ी नीली जर्सी पहनते हैं तो खिलाड़ियों और मैदान के बीच दृश्य अंतर (कॉन्ट्रास्ट) कम हो जाता है। इससे स्टेडियम में मौजूद दर्शकों और टेलीविजन पर मैच देखने वालों को खिलाड़ियों को स्पष्ट रूप से पहचानने में कठिनाई हो सकती है। उनका मानना है कि केसरिया रंग खिलाड़ियों को मैदान पर अधिक स्पष्ट रूप से उभारने में मदद करेगा और प्रसारण की गुणवत्ता भी बेहतर होगी। अधिकारियों ने यह भी दोहराया कि इस फैसले का किसी राजनीतिक विचारधारा से कोई संबंध नहीं है और इसे केवल खेल तथा डिज़ाइन के दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।
हालांकि, पूर्व खिलाड़ियों और कई खेल प्रशंसकों का कहना है कि किसी भी राष्ट्रीय टीम की जर्सी केवल कपड़ा नहीं होती, बल्कि वह उसकी ऐतिहासिक पहचान और भावनात्मक विरासत का प्रतीक होती है। उनका मानना है कि भारतीय हॉकी की पहचान दशकों से नीले रंग के साथ जुड़ी रही है और अचानक उसमें बदलाव करना कई प्रशंसकों को स्वीकार्य नहीं है। वहीं कुछ लोग इस नए प्रयोग का समर्थन भी कर रहे हैं और उनका कहना है कि समय के साथ खेलों में नई सोच और आधुनिक डिज़ाइन को अपनाना भी जरूरी है।
भारतीय पुरुष हॉकी टीम का अभियान 14 से 30 अगस्त तक बेल्जियम और नीदरलैंड में आयोजित होने वाले एफआईएच हॉकी वर्ल्ड कप में शुरू होगा, जबकि महिला प्रतियोगिता 15 से 30 अगस्त तक खेली जाएगी। ऐसे में टूर्नामेंट शुरू होने से पहले नई जर्सी को लेकर छिड़ी बहस ने भारतीय हॉकी को सुर्खियों में ला दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर होगी कि विश्व कप में टीम अपने प्रदर्शन से इस विवाद को पीछे छोड़ पाती है या नहीं।
