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यमन में हूतियों का बड़ा मिसाइल हमला, सैन्य ट्रेनिंग कैंप में कम से कम 18 लोगों की मौत; रियाद में भी हमले की खबर

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यमन में हूती विद्रोहियों ने एक बार फिर बड़ा हमला किया है। सोमवार, 19 अक्टूबर को दक्षिणी यमन के शबवा प्रांत में सरकारी सेना के सैन्य ट्रेनिंग कैंप को निशाना बनाया गया। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, इस हमले में कम से कम 18 लोगों की मौत हुई है। हमला उस समय हुआ, जब सैनिक सुबह के प्रशिक्षण में शामिल थे। घटना के बाद इलाके में तनाव बढ़ गया है और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जताई जा रही है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, हूती विद्रोहियों ने सैन्य कैंप पर हमला करने के लिए तीन बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। मिसाइलों ने प्रशिक्षण ले रहे सैनिकों को निशाना बनाया। शुरुआती जानकारी में हताहतों की संख्या कम बताई गई थी, लेकिन अलग-अलग रिपोर्टों में मृतकों और घायलों की संख्या को लेकर अंतर सामने आया है। इसलिए वास्तविक नुकसान का अंतिम आंकड़ा आधिकारिक पुष्टि के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

यह हमला ऐसे समय में हुआ है, जब यमन में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार और हूती विद्रोहियों के बीच संघर्ष फिर तेज हो रहा है। यमन की सरकार को सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन का समर्थन हासिल है, जबकि हूती राजधानी सना और देश के उत्तरी हिस्सों के बड़े क्षेत्रों पर नियंत्रण रखते हैं। हाल के हफ्तों में दोनों पक्षों के बीच सैन्य गतिविधियां बढ़ने से क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर भी चिंता गहरी हुई है।

शबवा प्रांत रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। यह दक्षिणी यमन में स्थित है और यहां ऊर्जा से जुड़े अहम ठिकाने भी मौजूद हैं। सरकारी बलों ने इसी महीने हूतियों के नियंत्रण वाले क्षेत्रों को वापस हासिल करने के लिए अभियान शुरू किया था। इस पृष्ठभूमि में सैन्य प्रशिक्षण शिविर पर हुआ हमला संघर्ष को और गंभीर बना सकता है।

यमन में जारी संघर्ष का असर अब आसपास के देशों तक भी दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब के नजरान क्षेत्र में रविवार को एक रिहायशी इलाके में प्रोजेक्टाइल गिरने से छह नागरिक घायल हो गए। इस घटना में तीन घरों और तीन वाहनों को नुकसान पहुंचने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, इस हमले और शबवा के सैन्य कैंप पर हुए हमले की परिस्थितियां अलग-अलग हैं।

यमन का संघर्ष 2014 में उस समय तेज हुआ था, जब हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद 2015 में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने सरकार के समर्थन में सैन्य हस्तक्षेप किया। वर्ष 2022 में संघर्ष कम करने के लिए हुआ युद्धविराम कुछ समय तक प्रभावी रहा, लेकिन हालिया महीनों में लड़ाई फिर तेज होने से देश में अस्थिरता बढ़ी है।

शबवा हमले के बाद यमन की सरकारी व्यवस्था और सैन्य बलों की ओर से सुरक्षा मजबूत करने की मांग उठने की संभावना है। शुरुआती रिपोर्टों में हताहतों की संख्या और हमले की परिस्थितियों को लेकर अलग-अलग जानकारी सामने आई है। ऐसे में आगे की जांच और अधिकारियों की विस्तृत जानकारी से ही यह साफ हो पाएगा कि हमले में कुल कितने लोग मारे गए और कितने घायल हुए।

यमन में बढ़ती हिंसा का असर केवल स्थानीय आबादी तक सीमित नहीं है। लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलमार्ग के आसपास बढ़ता तनाव अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है। फिलहाल शबवा में हुए मिसाइल हमले ने संघर्ष की गंभीरता को फिर उजागर कर दिया है, जबकि क्षेत्र में आगे की सैन्य कार्रवाई पर दुनिया की नजर बनी हुई है।

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