IIT बॉम्बे के 20 वर्षीय छात्र साहिल रवींद्र वाकोड़े की मौत के मामले में मुंबई पुलिस ने उनके पिता की शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की है। पुलिस ने मामले में आत्महत्या के लिए उकसाने से जुड़ी भारतीय न्याय संहिता की धारा 108 के साथ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की संबंधित धाराएं भी लगाई हैं। एफआईआर में प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला का नाम दर्ज है, जबकि कुछ अन्य लोगों को फिलहाल अज्ञात आरोपी के तौर पर शामिल किया गया है। मामले की जांच आगे क्राइम ब्रांच को सौंपे जाने की जानकारी सामने आई है।
साहिल वाकोड़े IIT बॉम्बे के एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में दूसरे वर्ष के छात्र थे। शुक्रवार शाम उन्हें पवई स्थित संस्थान के हॉस्टल के कमरे में मृत पाया गया था। पुलिस ने शुरुआत में आकस्मिक मौत की रिपोर्ट दर्ज की थी। अधिकारियों के मुताबिक घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला। उनकी मौत से कुछ घंटे पहले परीक्षा के दौरान उन्हें मोबाइल फोन इस्तेमाल करते हुए पकड़े जाने की बात सामने आई थी।
इस मामले में साहिल के पिता रविंद्र वाकोड़े ने आरोप लगाया है कि उनके बेटे को पिछले कुछ महीनों से जातिगत भेदभाव और मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा था। शिकायत में प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला पर जातिसूचक टिप्पणी करने और साहिल को कथित तौर पर परेशान करने का आरोप लगाया गया है। परिवार ने यह भी दावा किया है कि साहिल ने उन्हें इस तरह के व्यवहार के बारे में बताया था। इन आरोपों की अभी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस मामले की जांच कर रही है।
पुलिस के अनुसार, साहिल के पिता की शिकायत में जिन लोगों के नाम दिए गए हैं, उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने कहा है कि घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जाएगी। एफआईआर में प्रोफेसर डूला के अलावा कुछ अन्य अधिकारियों और संबंधित लोगों का भी उल्लेख किया गया है। मामले में लगाए गए आरोपों की जांच के दौरान पुलिस संस्थान में साहिल के साथ हुए कथित व्यवहार और उनकी मौत से पहले की घटनाओं की परिस्थितियों को खंगालेगी।
साहिल की मौत परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन के इस्तेमाल से जुड़ी घटना के बाद हुई थी। IIT बॉम्बे के अनुसार, साहिल ने परीक्षा का प्रश्नपत्र ChatGPT पर अपलोड कर जवाब हासिल करने की कोशिश की थी। संस्थान का कहना है कि इस मामले में साहिल के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी। संस्थान के मुताबिक, इंस्ट्रक्टर और विभागाध्यक्ष ने उनसे बात की, उन्हें समझाया और भरोसा दिलाया कि इस घटना का उनके अकादमिक करियर पर असर नहीं पड़ेगा। इसके बाद साहिल अपने हॉस्टल लौट गए थे।
हालांकि, साहिल के परिवार और कुछ छात्रों ने संस्थान के इस दावे पर सवाल उठाए हैं। छात्रों का आरोप है कि परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन इस्तेमाल करते पकड़े जाने के बाद साहिल को निलंबन की धमकी दिए जाने की बात सामने आई थी। इसके बाद कैंपस में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन भी किया और मामले की पारदर्शी जांच की मांग उठाई। छात्रों के एक समूह ने संस्थान के प्रशासन के खिलाफ भी सवाल उठाए हैं।
IIT बॉम्बे ने जातिगत भेदभाव के आरोपों से इनकार किया है। संस्थान का कहना है कि साहिल की मौत से पहले उनके खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी और उन्हें उनके अकादमिक भविष्य को लेकर आश्वस्त किया गया था। संस्थान ने यह भी कहा है कि साहिल की मौत से जुड़ी परिस्थितियों की जांच संबंधित अधिकारी कर रहे हैं और वह उनके दोस्तों, सहपाठियों, फैकल्टी सदस्यों तथा अन्य प्रभावित लोगों को आवश्यक सहायता उपलब्ध करा रहा है।
पुलिस की एफआईआर के बाद अब जांच का दायरा साहिल की मौत से पहले की घटनाओं, परिवार की ओर से लगाए गए जातिगत उत्पीड़न के आरोपों और परीक्षा से जुड़ी घटना तक रहेगा। अधिकारियों ने मामले में सभी पहलुओं की जांच की बात कही है। फिलहाल एफआईआर में लगाए गए आरोप जांच का विषय हैं और किसी आरोपी की भूमिका या जिम्मेदारी अदालत में साबित होना बाकी है।
