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वैश्विक तनाव के बीच भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत

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मिडिल ईस्ट में अमेरिका-ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी सकारात्मक खबर सामने आई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार देश का विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेक्स रिजर्व) 4.88 अरब डॉलर बढ़कर 728.49 अरब डॉलर के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है। यह वृद्धि 27 फरवरी 2026 को समाप्त सप्ताह के दौरान दर्ज की गई और यह भारत के विदेशी मुद्रा भंडार का अब तक का सबसे बड़ा स्तर माना जा रहा है।

आरबीआई के मुताबिक विदेशी मुद्रा भंडार में यह उछाल मुख्य रूप से विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों और सोने के भंडार में बढ़ोतरी के कारण हुआ है। विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां, जो कुल भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा होती हैं, करीब 56.1 करोड़ डॉलर बढ़कर 573.12 अरब डॉलर तक पहुंच गईं। इसके अलावा भारत के स्वर्ण भंडार के मूल्य में भी लगभग 4.14 अरब डॉलर की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे कुल गोल्ड रिजर्व 131.63 अरब डॉलर हो गया। साथ ही अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में भारत के विशेष आहरण अधिकार (SDR) और आरक्षित स्थिति में भी हल्की बढ़ोतरी देखने को मिली है।

विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी मुद्रा भंडार में यह मजबूती भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करती है। जब वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ती है या तेल की कीमतों में उछाल आता है, तब मजबूत फॉरेक्स रिजर्व देश की मुद्रा यानी रुपये को स्थिर रखने और आयात-निर्यात से जुड़े भुगतान संतुलन को संभालने में मदद करता है। विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल केंद्रीय बैंक जरूरत पड़ने पर बाजार में डॉलर की आपूर्ति बढ़ाने और रुपये की गिरावट को रोकने के लिए भी करता है।

हालांकि इस समय वैश्विक बाजारों में मिडिल ईस्ट के युद्ध का असर साफ दिखाई दे रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इसका असर भारतीय मुद्रा पर भी पड़ा है और रुपये में कमजोरी देखी गई है, जिसके चलते आरबीआई को बाजार में हस्तक्षेप कर स्थिति को स्थिर रखने के लिए कदम उठाने पड़े।

आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार मौजूदा वैश्विक अनिश्चितता के दौर में भारत का मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार देश की वित्तीय स्थिरता के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यह भंडार न केवल आयात भुगतान और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को सुरक्षित बनाता है, बल्कि किसी भी वैश्विक आर्थिक संकट के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था को झटकों से बचाने में भी मदद करता है। इसलिए मौजूदा परिस्थितियों में फॉरेक्स रिजर्व का रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी राहत और सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

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