ईरान-इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर वैश्विक तेल सप्लाई रुक जाए तो भारत कितने दिन तक खुद को संभाल सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत के पास कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का कुल भंडार अलग-अलग स्तरों पर मौजूद है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश के पास कुल मिलाकर करीब 74 दिनों तक चलने वाला तेल भंडार है, जिसमें रिफाइनरियों और कंपनियों के स्टॉक भी शामिल हैं।
हालांकि, इसमें से “स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व” यानी आपातकालीन भंडार काफी कम है, जो अकेले सिर्फ 9–10 दिनों की जरूरत पूरी कर सकता है। बाकी स्टॉक ऑयल कंपनियों और सप्लाई चेन में फैला होता है, जो सामान्य हालात में उपयोग के लिए रखा जाता है।
कुछ रिपोर्ट्स यह भी बताती हैं कि भारत के पास कुल मिलाकर लगभग 250 मिलियन बैरल (करीब 4000 करोड़ लीटर) तेल का स्टॉक है, जो पूरे देश की जरूरतों को लगभग 7–8 हफ्तों (करीब 50–60 दिन) तक पूरा कर सकता है।
लेकिन विशेषज्ञों की चिंता यह है कि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है और उसमें भी लगभग 80% तेल समुद्री रास्तों, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य से आता है। अगर यह रास्ता लंबे समय तक बंद रहता है, तो यह भंडार तेजी से खत्म हो सकता है और देश को गंभीर ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ सकता है।
हाल ही में सामने आई खबरों के अनुसार, कुछ क्षेत्रों में एलपीजी जैसी जरूरी गैस का भंडार सिर्फ 20 दिनों के आसपास ही रह गया है, जिससे यह साफ होता है कि सप्लाई बाधित होने पर स्थिति जल्दी बिगड़ सकती है।
कुल मिलाकर, भारत के पास फिलहाल कुछ हफ्तों से लेकर करीब दो महीने तक का तेल भंडार है, लेकिन लंबा युद्ध या सप्लाई में बड़ी रुकावट देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।
