
नई दिल्ली – भारतीय सेना ने अपनी आर्टिलरी (तोपखाना) क्षमता को और ज़्यादा सशक्त और आधुनिक बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सेना ने पुणे की रक्षा और एयरोस्पेस कंपनी नाइब लिमिटेड को लगभग ₹292.69 करोड़ के बड़े ऑर्डर के साथ यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम (Universal Rocket Launcher System) की आपूर्ति का अनुबंध दिया है। इस सौदे का उद्देश्य सेना की दीर्घ दूरी तक मारक क्षमता और रणनीतिक फायरपावर को एक नए स्तर पर ले जाना है और इसे आपातकालीन खरीद (Emergency Procurement) के तहत जल्दी से लागू किया जाएगा।
यह नया सिस्टम सेना के लाइन ऑफ कंट्रोल (LAC) और पाकिस्तान के साथ पश्चिमी सीमाओं पर आर्टिलरी फायरपावर को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा। यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम की सबसे खास बात यह है कि यह मल्टी-कैलिबर और मल्टी-रेंज (150 से 300 किलोमीटर तक) रॉकेट प्लेटफॉर्म को एक ही लॉन्चर से दागने की क्षमता रखता है। इससे सैनिकों को अलग-अलग दूरी के लिए अलग-अलग सिस्टम रखने की आवश्यकता नहीं रहेगी और एक ही आधार पर कई प्रकार के रॉकेट का उपयोग संभव होगा।
उन्नत तकनीक और सुविधा
यह सिस्टम इज़रायल की एल्बिट सिस्टम्स के तकनीकी सहयोग से विकसित PULS (Precise and Universal Launching System) तकनीक पर आधारित है, जिससे भारतीय सेना को गति, लचीलापन और विविध रॉकेट क्षमताएँ एक ही प्लेटफॉर्म पर मिलेंगी। यह लॉन्चर 6×6 या 8×8 व्हीकल सिस्टम पर आसानी से लगाया जा सकता है और “शूट-एंड-स्कूट” जैसी उन्नत क्षमता प्रदान करता है, जिससे फायरिंग के तुरंत बाद यह अथवा तैनाती स्थल से हिलकर दुश्मन की प्रतिक्रिया से बच सकता है।
मौजूदा समय में भारतीय सेना पहले से ही पिनाका मल्टी-बैरेल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम जैसी उन्नत प्रणालियों से लैस है, लेकिन यूनिवर्सल सिस्टम के आने से तोपखाना शक्ति में और ज़्यादा बहुमुखी क्षमता जुड़ जाएगी। पिनाका सिस्टम पहले से ही अपनी गति और मारक क्षमता के लिए जाना जाता है और अब इसकी क्षमता को नए तरीकों से आगे बढ़ाया जा रहा है।
आत्मनिर्भर भारत और रक्षा निर्माण
यह अनुबंध “मेक इन इंडिया” और आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। नाइब लिमिटेड को दिया गया यह बड़ा रक्षा ऑर्डर यह संकेत देता है कि भारत अपने रक्षा उत्पादन को घरेलू स्तर पर सशक्त कर रहा है, साथ ही विदेशी तकनीक के साथ साझेदारी करके आधुनिक हथियार प्रणालियों का विकास भी कर रहा है। इससे घरेलू उद्योगों को भी मजबूती मिलेगी और रक्षा क्षेत्र में नए रोजगार और विनिर्माण क्षमता के अवसर खुलेंगे।
अनुबंध के अनुसार नाइब लिमिटेड को लॉन्चर, ग्राउंड इक्विपमेंट, आवश्यक एक्सेसरीज़, प्रोजेक्टाइल और गोला-बारूद की सप्लाई करनी होगी। डिलीवरी कार्य 12 महीनों के भीतर चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा, जिससे सेना को जल्द से जल्द इन उन्नत प्रणालियों तक पहुंच सुनिश्चित हो सके।
रणनीतिक महत्व
विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे सिस्टम की तैनाती से भारतीय सेना को न केवल सीमান্ত पर निगरानी और सुरक्षा फ़ायदा मिलेगा, बल्कि यह रणनीतिक दीर्घ दूरी फायरपावर के मामले में मौजूदा क्षमताओं को कई गुना बढ़ाएगा. यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर प्रणाली से सीमा पार दुश्मन ठिकानों को प्रभावी ढंग से निशाना बनाना और मैदान में तेजी से बाज़ी पलटना संभव हो सकेगा।
कुल मिलाकर, यह निर्णय भारतीय सेना के आधुनिककरण, रणनीतिक क्षमता विस्तार और रक्षा उत्पादन आत्मनिर्भरता को एक नई दिशा देने वाला साबित हो रहा है। इससे न केवल हमारी सुरक्षा मजबूती बढ़ेगी बल्कि भारतीय रक्षा उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने का अवसर भी मिलेगा।



