Site icon Prsd News

ईरान–अमेरिका तनाव बढ़ा, सऊदी अरब की भूमिका और ट्रंप की कूटनीति ने मिडिल ईस्ट में माहौल और गर्माया

download 1 20

मध्य पूर्व में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर पहुँचते दिखाई दे रहा है, जिससे वैश्विक राजनीति में नई हलचल पैदा हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कूटनीतिक और सैन्य तैयारियाँ दोनों ने मिलकर इस क्षेत्र को एक बार फिर युद्ध के कगार पर ला खड़ा किया है। अमेरिकी नेतृत्व ईरान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने और परमाणु कार्यक्रम पर प्रभावी समझौते को लेकर अड़े हैं, वहीं तेहरान ने सतर्क लेकिन दृढ़ प्रतिक्रिया दी है, जिससे तनाव और बढ़ा है।

अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी को बढ़ाया है और USS अब्राहम लिंकन जैसे शक्तिशाली युद्धपोत समेत कई विध्वंसक और लड़ाकू जहाजों को ईरान के नजदीक तैनात कर दिया है। यह क़दम ट्रंप प्रशासन की उस नीति का हिस्सा है जिसमें ईरान को बातचीत की ओर प्रेरित करने के साथ-साथ इसके परमाणु कार्यक्रम को रोकने की धमकी दी जा रही है। ट्रंप का कहना है कि वह ईरान के साथ डील चाहता है, लेकिन शर्तें स्वीकार न होने पर अमेरिका मजबूरी में सैन्य कार्रवाई कर सकता है।

सऊदी अरब की भूमिका इस तनाव में खुलकर सामने आई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सऊदी रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान ने व्हाइट हाउस में अमेरिका को स्पष्ट कहा है कि अगर ट्रंप ईरान के खिलाफ कड़े कदम नहीं उठाते हैं तो इससे तेहरान और मजबूत होगा। यह बयान सऊदी की सार्वजनिक बातचीत से अलग, गुप्त बैठक में सामने आया है और संकेत देता है कि रियाद की रणनीति अब कहीं अधिक आक्रामक हो सकती है।

वहीं दूसरी तरफ सऊदी अरब ने कुछ समय पहले अमेरिका को अपने एयरस्पेस का उपयोग युद्ध के लिए न देने का निर्णय लिया था, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि सार्वजनिक बयान और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच सऊदी रुख में कुछ मतभेद हैं। इस सबके बीच ईरान ने भी प्रतिक्रिया स्वरूप अपने नौसैनिक और सैन्य अभ्यास तेज कर दिए हैं और अपने क्षेत्रीय रक्षा उपायों को मजबूत कर रहा है।

इस तनाव के बीच रूस, यूरोपीय देशों और संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय अभिनेता भी सक्रिय हैं—कुछ क्षेत्रीय युद्ध के खतरे को लेकर चेतावनी दे रहे हैं, तो कुछ कूटनीति और बातचीत को बढ़ावा देने की अपील कर रहे हैं। यूरोपीय संघ ने ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड को आतंकवादी समूहों की सूची में डालने जैसे कदम उठाए हैं, जो आगे तनाव को बढ़ाने का कारण बन सकते हैं।

इसी बीच, अमेरिकी प्रशासन ने सऊदी अरब और इज़राइल को भी हथियारों की आपूर्ति के प्रस्ताव को बढ़ावा दिया है, जिसमें उन्नत पैट्रियट मिसाइल सिस्टम और अपाचे हेलिकॉप्टर शामिल हैं, यह संकेत देता है कि अमेरिका अपने सहयोगियों को सशक्त कर रहा है ताकि वह ईरान के संभावित प्रतिकार को संतुलित कर सके।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह तनाव नियंत्रण से बाहर गया, तो खाड़ी क्षेत्र में व्यापक संघर्ष या सीधे तौर पर युद्ध प्रारंभ होने की आशंका बढ़ सकती है। वर्तमान में ट्रंप प्रशासन बातचीत और दबाव दोनों की नीति अपनाए हुए है, लेकिन यदि किसी एक पक्ष की धैर्य सीमा गिरती है, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

इस बीच, सऊदी अरब की भूमिका और अमेरिका के सैन्य निर्णय, दोनों ही मध्य पूर्व की राजनीति में संतुलन और असंतुलन दोनों को जन्म दे रहे हैं, जिससे वैश्विक सुरक्षा और ऊर्जा बाजारों पर भी असर पड़ेगा। तनाव की यह स्थिति न केवल क्षेत्रीय देशों को बल्कि पूरी दुनिया को अगले कुछ हफ्तों में गंभीर भू-राजनीतिक बदलावों के लिए तैयार रहने का संकेत दे रही है।

Exit mobile version