ईरान और इज़राइल के बीच चल रहे भीषण संघर्ष के बीच एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद देश की सर्वोच्च धार्मिक संस्था “असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स” ने उनके उत्तराधिकारी के चयन पर सहमति बना ली है। हालांकि अभी तक नए सुप्रीम लीडर का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसी बीच इज़राइल ने कड़ा बयान देते हुए चेतावनी दी है कि जो भी खामेनेई की जगह नया सर्वोच्च नेता बनेगा, वह इज़राइल के निशाने पर होगा।
रिपोर्टों के अनुसार, ईरान की यह धार्मिक परिषद देश के सर्वोच्च नेता का चुनाव करती है और इस बार भी उसने बहुमत से नए नेता को चुनने का फैसला कर लिया है। लेकिन क्षेत्र में जारी युद्ध और सुरक्षा कारणों से इस निर्णय को फिलहाल गुप्त रखा गया है। बताया जा रहा है कि चयन की प्रक्रिया तेजी से पूरी की गई, क्योंकि मौजूदा हालात में ईरान के शीर्ष नेतृत्व को जल्द स्थिर करना बेहद जरूरी माना जा रहा है।
दूसरी ओर, इज़राइली सेना ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि केवल नया सुप्रीम लीडर ही नहीं बल्कि उसे चुनने की प्रक्रिया में शामिल सभी लोग भी संभावित लक्ष्य हो सकते हैं। इज़राइली सेना ने फारसी भाषा में जारी एक संदेश में कहा कि “इज़राइल का हाथ हर उस व्यक्ति तक पहुंचेगा जो खामेनेई के उत्तराधिकारी को नियुक्त करने की कोशिश करेगा।” इस चेतावनी से पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि खामेनेई के उत्तराधिकारी का चयन ईरान की राजनीति और पूरे मिडिल ईस्ट की रणनीतिक स्थिति पर गहरा असर डाल सकता है। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा जा रहा है कि खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को संभावित उत्तराधिकारी के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि इस पर आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
इधर अमेरिका और इज़राइल के साथ जारी सैन्य टकराव के कारण ईरान में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। तेहरान और आसपास के कई इलाकों में हवाई हमलों और मिसाइल हमलों की खबरें सामने आई हैं। इसी पृष्ठभूमि में नए सुप्रीम लीडर का चयन ईरान के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि वही देश की सैन्य, राजनीतिक और परमाणु नीतियों पर अंतिम फैसला लेने वाला सर्वोच्च पद होता है।
विश्लेषकों का कहना है कि यदि इज़राइल अपनी चेतावनी पर कायम रहता है तो यह विवाद और भी खतरनाक रूप ले सकता है। ऐसे में खामेनेई के उत्तराधिकारी का ऐलान केवल ईरान की आंतरिक राजनीति ही नहीं बल्कि पूरे मिडिल ईस्ट की शक्ति संतुलन को भी प्रभावित कर सकता है।
