मिडिल ईस्ट में जारी भीषण तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका के साथ किसी भी तरह की सीजफायर वार्ता से साफ इनकार कर दिया है। पाकिस्तान में तैनात ईरानी राजदूत रज़ा अमीरी मोगद्दम ने स्पष्ट कहा कि तेहरान और वॉशिंगटन के बीच न तो कोई सीधी और न ही परोक्ष बातचीत चल रही है। यह बयान ऐसे समय आया है जब Donald Trump ने दावा किया था कि ईरान के साथ युद्धविराम को लेकर बातचीत हो रही है और हालात जल्द सामान्य हो सकते हैं।
ईरान ने अमेरिकी दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि वॉशिंगटन “खुद से ही बातचीत कर रहा है” और दुनिया को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है। ईरानी पक्ष का आरोप है कि अमेरिका ने पहले बातचीत का दिखावा किया और फिर अचानक सैन्य कार्रवाई कर युद्ध शुरू कर दिया, इसलिए अब उस पर भरोसा करना संभव नहीं है।
दरअसल, अमेरिका की ओर से एक 15 सूत्रीय शांति प्रस्ताव भी भेजे जाने की खबर सामने आई है, जिसे पाकिस्तान के जरिए ईरान तक पहुंचाया गया। इस प्रस्ताव में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर नियंत्रण, मिसाइल सीमाएं, प्रतिबंधों में राहत और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में आवाजाही से जुड़े मुद्दे शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि ईरान ने इस प्रस्ताव पर भी कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी है और साफ कर दिया है कि मौजूदा हालात में बातचीत की कोई गुंजाइश नहीं है।
दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान, तुर्की और कुछ अन्य देश इस संकट को खत्म करने के लिए मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं। पाकिस्तान ने यहां तक कहा है कि वह अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति वार्ता की मेजबानी करने को तैयार है, लेकिन तेहरान का सख्त रुख इस पहल के रास्ते में बड़ी बाधा बनता नजर आ रहा है।
इस बीच जंग लगातार तेज होती जा रही है। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच हमले जारी हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर है और वैश्विक ऊर्जा सप्लाई पर भी असर पड़ रहा है। ऐसे हालात में ईरान का यह साफ संदेश कि वह अमेरिका से कोई बातचीत नहीं करेगा, आने वाले दिनों में इस संघर्ष को और गंभीर बना सकता है।
