
मध्य पूर्व में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी भीषण संघर्ष का असर अब खाड़ी देशों तक गहराई से पहुंचने लगा है और इसका सबसे बड़ा उदाहरण बहरीन में देखने को मिल रहा है। हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि यहां आंतरिक अस्थिरता तेजी से बढ़ रही है और राजनीतिक संकट की आशंका भी गहरा गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बहरीन में शिया समुदाय के लोग बड़ी संख्या में सड़कों पर उतर आए हैं और अमेरिका-इजरायल के हमलों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
दरअसल, बहरीन की आबादी में लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा शिया मुस्लिमों का है, लेकिन सत्ता सुन्नी शासकों के हाथ में है। यही असंतुलन लंबे समय से असंतोष की वजह रहा है, जो अब ईरान के समर्थन और युद्ध के कारण और भड़क गया है। जैसे-जैसे जंग तेज हो रही है, वैसे-वैसे बहरीन के अंदर भी विरोध और सरकार के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है।
बताया जा रहा है कि 28 फरवरी से शुरू इस युद्ध के बाद अब तक 200 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें अधिकांश शिया समुदाय से जुड़े हैं। इन पर देशद्रोह, जासूसी, दुश्मन देशों का समर्थन और राजशाही के खिलाफ भड़काऊ गतिविधियों जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि कई लोगों को बिना कानूनी सहायता के हिरासत में रखा गया है और उनके परिवारों को भी जानकारी नहीं दी जा रही, जिससे देश में डर का माहौल बन गया है।
इस पूरे घटनाक्रम के पीछे बहरीन की रणनीतिक स्थिति भी एक बड़ा कारण है। यहां अमेरिका की पांचवीं नौसेना (US Fifth Fleet) का मुख्यालय मौजूद है, जो ईरान के निशाने पर रहा है। ईरान पहले भी बहरीन पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर चुका है, जिससे वहां के नागरिकों को नुकसान पहुंचा और तनाव और बढ़ गया।
वहीं दूसरी ओर, बहरीन सरकार ने इजरायल के साथ अपने संबंध सामान्य कर रखे हैं, जिससे शिया समुदाय में और नाराजगी बढ़ी है। कई प्रदर्शनकारियों ने खुले तौर पर ईरान के प्रति समर्थन जताया है और अमेरिकी ठिकानों पर हमलों का समर्थन किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही स्थिति बनी रही, तो बहरीन में 2011 के अरब स्प्रिंग जैसी स्थिति दोबारा पैदा हो सकती है, जहां बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे और सरकार को कड़ी कार्रवाई करनी पड़ी थी।
मध्य पूर्व में जारी इस जंग ने पहले ही कई देशों को अपनी चपेट में ले लिया है, और अब यह साफ दिख रहा है कि इसका असर सिर्फ युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्रीय राजनीति और सामाजिक संतुलन को भी गहराई से प्रभावित कर रहा है। बहरीन की स्थिति इस बात का संकेत है कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो यह संघर्ष पूरे खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता और संभावित सत्ता परिवर्तन की स्थिति पैदा कर सकता है।



