
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद (Islamabad, Pakistan) में शुक्रवार, 6 फरवरी 2026 को जुमे की नमाज़ के समय एक बहुत ही गंभीर आत्मघाती विस्फोट (suicide bombing) हुआ, जिसने शहर तथा देश भर में चिंता और शोक की लहर फैला दी है। यह धमाका राजधानी के तरलाई कलां इलाके (Tarlai Kalan area) में स्थित प्रसिद्ध खदीजातुल कुबरा (Khadija Tul Kubra) शिया मस्जिद-इमामबारगाह में हुआ, जहाँ Friday prayers के लिए बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।
घटना उस समय हुई जब मस्जिद में श्रद्धालु नमाज़ अदा कर रहे थे और बाहर सुरक्षा जांच से गुजर रहे थे। पुलिस तथा सुरक्षा कर्मियों ने हमलावर को मस्जिद के गेट पर रोकने की कोशिश की, लेकिन उसने वहीं बम धमाका (bomb explosion) कर दिया, जिससे शक्तिशाली विस्फोट हुआ और आसपास अफरातफरी मच गई। कई स्थानीय लोगों के अनुसार विस्फोट इतनी तीव्र थी कि घायल और मृतकों के शरीर के टुकड़े चारों ओर बिखरे दिखे।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार कम से कम 31 लोगों की मौत हो चुकी है और लगभग 169 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं, जिनमें से कई की हालत गंभीर है और मृतकों की संख्या बढ़ने की भी आशंका है। अस्पतालों में इमरजेंसी (emergency) की घोषणा कर दी गई है और घायल लोगों को पास के बड़े अस्पतालों में भर्ती किया गया है।
घटना के बाद पुलिस और फॉरेंसिक टीमों ने पूरे इलाके को सील कर दिया है तथा मामले की जांच जारी है। अभी तक किसी भी आतंकवादी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन प्रारंभिक जांच और सुरक्षाबलों के बयान के अनुसार यह हमला आतंकवादी गतिविधि (terrorist act) लगता है, जिसमें कई खुफिया एजेंसियों तथा सुरक्षा विशेषज्ञों का ध्यान Tehrik-i-Taliban Pakistan (TTP) या Islamic State Khorasan (IS-K) जैसे समूहों पर है।
इस्लामाबाद के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी (Asif Ali Zardari) तथा प्रधानमंत्री सहित कई राजनीतिक और धार्मिक नेतृत्व ने हमले की निंदा की है और वह पीड़ितों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा है कि सुरक्षा बलों को इस घटना को अंजाम देने वाले दोषियों को पकड़ने और सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। इसी के साथ पाकिस्तान समेत कई देशों ने भी इस हमले की कड़ी निंदा की है और आतंकवाद के खिलाफ सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया है।
यह हमला भारत-पाकिस्तान सीमा के पास स्थित राजधानी शहर में हुआ सबसे गंभीर आतंकी हमला माना जा रहा है, जो धार्मिक स्थल और नमाज़ पढ़ने वालों को निशाना बनाकर किया गया है। इससे पाकिस्तान में सुरक्षा, अल्पसंख्यक समूहों के खिलाफ हिंसा और देश की आंतरिक स्थिति पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं।



