इजरायल के आम चुनाव में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनके प्रमुख प्रतिद्वंद्वी गादी आइज़ेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। 27 अक्टूबर 2026 को हुए मतदान के बाद जारी एग्जिट पोल में किसी भी पक्ष को स्पष्ट बहुमत मिलता नहीं दिख रहा। शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, नेतन्याहू के गठबंधन और विपक्षी खेमे के बीच सीटों का अंतर बेहद कम है। ऐसे में चुनाव के बाद सरकार बनाने के लिए राजनीतिक दलों के बीच बातचीत और गठबंधन की रणनीति निर्णायक साबित हो सकती है।
इजरायल की संसद को नेसेट कहा जाता है, जिसमें कुल 120 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए किसी गठबंधन को कम से कम 61 सांसदों का समर्थन चाहिए। एग्जिट पोल के अलग-अलग अनुमानों में नेतन्याहू के गठबंधन को करीब 50 से 52 सीटें, जबकि आइज़ेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी खेमे को लगभग 49 से 52 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है। इन आंकड़ों में अंतर के कारण फिलहाल किसी भी पक्ष की सरकार बनाने की स्थिति स्पष्ट नहीं है।
एग्जिट पोल में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी सबसे बड़ी एकल पार्टी के रूप में उभरती दिखाई दे रही है। हालांकि, किसी एक पार्टी का सबसे ज्यादा सीटें हासिल करना और पूरे गठबंधन का बहुमत तक पहुंचना अलग-अलग बातें हैं। इजरायल की चुनावी व्यवस्था में पार्टियों को सरकार बनाने के लिए दूसरी पार्टियों का समर्थन जुटाना पड़ता है। इसलिए अंतिम नतीजों के साथ-साथ यह भी महत्वपूर्ण होगा कि कौन-से दल किस गठबंधन के साथ जाने का फैसला करते हैं।
इजरायल में इस बार मतदान को प्रधानमंत्री नेतन्याहू के नेतृत्व और 7 अक्टूबर 2023 के हमलों के बाद सरकार की सुरक्षा नीतियों पर जनता की राय के तौर पर भी देखा गया। पिछले कुछ वर्षों में गाजा और क्षेत्र के अन्य हिस्सों में हुए संघर्ष, सुरक्षा व्यवस्था की विफलताओं को लेकर उठे सवाल और देश की अर्थव्यवस्था चुनावी बहस के प्रमुख मुद्दे रहे। नेतन्याहू के समर्थकों ने उनके सुरक्षा संबंधी फैसलों का बचाव किया, जबकि विपक्ष ने सरकार से जवाबदेही और नीतिगत बदलाव की मांग की।
इस चुनाव में मतदान प्रतिशत भी उल्लेखनीय रहा। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, लगभग 77.7 प्रतिशत पात्र मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया, जो 1999 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर बताया गया है। बड़ी संख्या में लोगों के मतदान केंद्रों तक पहुंचने से चुनाव के महत्व का संकेत मिला। हालांकि, अधिक मतदान अपने आप में किसी एक दल या गठबंधन की जीत की पुष्टि नहीं करता।
अरब-बहुल राजनीतिक दलों का प्रदर्शन भी सरकार गठन की प्रक्रिया में अहम हो सकता है। एग्जिट पोल में इन दलों को मिलाकर लगभग 16 से 19 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है। यदि दोनों प्रमुख गठबंधन बहुमत से दूर रहते हैं, तो इन दलों का समर्थन, बाहरी समर्थन या मतदान के दौरान अपनाया गया रुख सरकार गठन की संभावनाओं को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, अलग-अलग दलों के राजनीतिक मतभेदों के कारण गठबंधन का समीकरण जटिल बना हुआ है।
फिलहाल आधिकारिक मतगणना जारी है और अंतिम सीटों का बंटवारा एग्जिट पोल से अलग हो सकता है। नतीजे स्पष्ट होने के बाद इजरायल के राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग राजनीतिक दलों से परामर्श करेंगे और उस नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर सकते हैं, जिसके पास बहुमत जुटाने की बेहतर संभावना हो। इसके बाद गठबंधन बनाने के लिए बातचीत होगी। यदि कोई भी पक्ष आवश्यक समर्थन नहीं जुटा पाता, तो राजनीतिक गतिरोध लंबा खिंच सकता है और नए चुनाव की संभावना भी पैदा हो सकती है।
इसलिए फिलहाल इजरायल चुनाव में किसी एक नेता की जीत या हार को अंतिम मानना जल्दबाजी होगी। नेतन्याहू की लिकुड पार्टी सबसे बड़ी एकल पार्टी के रूप में सामने आती दिख रही है, लेकिन अगली सरकार का नेतृत्व कौन करेगा, यह अंतिम नतीजों और गठबंधन वार्ताओं से तय होगा। आने वाले दिनों में मतगणना और राजनीतिक दलों के फैसले इजरायल की नई सरकार की तस्वीर साफ करेंगे।
