इजरायल में 27 अक्टूबर को होने वाले चुनाव से पहले विदेशों में रहने वाले हजारों इजरायली नागरिक अपने देश लौट रहे हैं, ताकि मतदान में हिस्सा ले सकें। इस चुनाव को प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के राजनीतिक भविष्य के लिहाज से अहम माना जा रहा है। अनुमान है कि विदेशों में रह रहे करीब 67,000 इजरायली नागरिक वोट डालने के लिए वापस आ सकते हैं। इस बार चुनाव में सुरक्षा, युद्ध से जुड़ी नीतियों, सरकार के कामकाज और देश के भविष्य जैसे मुद्दे प्रमुख हैं।
इजरायल के चुनावी नियमों के तहत विदेशों में रहने वाले अधिकांश नागरिक ऑनलाइन या डाक के जरिए वोट नहीं डाल सकते। राजनयिकों और कुछ आधिकारिक प्रतिनिधियों को सीमित छूट मिलती है, जबकि अन्य मतदाताओं को मतदान के लिए देश में मौजूद रहना पड़ता है। इसी वजह से अमेरिका, यूरोप, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और दुनिया के अन्य हिस्सों में रहने वाले इजरायली नागरिक लंबी दूरी तय करके अपने देश पहुंच रहे हैं। इनमें से कई लोग अपनी यात्रा का खर्च खुद उठा रहे हैं।
विदेश से लौटने वाले मतदाताओं की संभावित संख्या ने चुनावी मुकाबले को लेकर चर्चा तेज कर दी है। इजरायल में 73 लाख से अधिक पंजीकृत मतदाता हैं और चुनाव से पहले आए सर्वेक्षणों में मुकाबला कड़ा दिखाई दिया है। कुछ अनुमानों के मुताबिक, विदेश से लौटने वाले नागरिकों के वोट संसद की लगभग दो सीटों के बराबर असर डाल सकते हैं। हालांकि, उनका वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि कितने लोग मतदान करते हैं और वे किन दलों को समर्थन देते हैं।
इस चुनाव में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी के सामने विपक्षी दलों की चुनौती है। पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट विपक्ष के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। चुनाव से पहले के कुछ सर्वेक्षणों में आइजेनकोट की पार्टी को लिकुड के मुकाबले बढ़त दिखाई गई, लेकिन किसी भी पक्ष के स्पष्ट बहुमत तक पहुंचने की स्थिति सुनिश्चित नहीं मानी जा रही। इजरायल की संसद नेसेट में कुल 120 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी होता है।
विदेश से लौट रहे कुछ मतदाताओं ने कहा है कि वे सरकार की सुरक्षा नीतियों, गाजा युद्ध से निपटने के तरीके और 7 अक्टूबर 2023 के हमलों से जुड़ी सुरक्षा विफलताओं को लेकर चिंतित हैं। कुछ लोग सरकार में बदलाव की उम्मीद के साथ मतदान करना चाहते हैं। वहीं, राजनीतिक विश्लेषकों ने यह भी सावधानी जताई है कि विदेश से आने वाले सभी मतदाता नेतन्याहू के विरोध में ही वोट करेंगे, ऐसा मानना सही नहीं होगा। उनके बीच भी अलग-अलग राजनीतिक विचार मौजूद हैं।
नेतन्याहू की सरकार को लेकर असंतोष का एक कारण 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले से पहले और उसके दौरान हुई सुरक्षा चूकों की जांच का मुद्दा भी है। विपक्ष के नेता इन घटनाओं की जांच के लिए स्वतंत्र आयोग गठित करने की मांग करते रहे हैं। इसके अलावा गाजा में युद्ध, क्षेत्रीय तनाव और सैन्य सेवा से जुड़े नियम भी चुनावी बहस का हिस्सा हैं। इन मुद्दों पर मतदाताओं की राय आने वाली सरकार की नीतियों को प्रभावित कर सकती है।
इजरायल में हाल के वर्षों में विदेश जाने वाले नागरिकों की संख्या भी चर्चा का विषय रही है। कुछ लोगों ने सुरक्षा स्थिति, राजनीतिक तनाव और सामाजिक परिस्थितियों को देश छोड़ने की वजह बताया है। अब उनमें से कुछ लोग चुनाव में भाग लेने के लिए वापस आ रहे हैं। हालांकि, विदेश से लौटने वाले मतदाताओं की संख्या और उनके मतदान व्यवहार से चुनाव का अंतिम परिणाम क्या होगा, इसका निश्चित अनुमान लगाना अभी संभव नहीं है।
इजरायल में मतदान के बाद नेसेट की सीटों का बंटवारा पार्टियों को मिले राष्ट्रीय मत प्रतिशत के आधार पर किया जाता है। किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने की स्थिति में सरकार बनाने के लिए गठबंधन की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में छोटे दलों और विभिन्न राजनीतिक समूहों का समर्थन निर्णायक बन सकता है। 27 अक्टूबर के मतदान और उसके बाद होने वाली गठबंधन वार्ताओं पर इजरायल की घरेलू नीतियों के साथ-साथ गाजा, क्षेत्रीय सुरक्षा और भारत-इजरायल संबंधों की दिशा को लेकर भी नजर रहेगी।
