Advertisement
लाइव अपडेटविश्व
Trending

मध्य-पूर्व में जंग और तेज

Advertisement
Advertisement

मध्य-पूर्व में ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष लगातार गंभीर होता जा रहा है। युद्ध के 17वें दिन भी दोनों पक्षों के बीच हमले और जवाबी कार्रवाई जारी है, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है। इजराइल की सेना ने हाल के दिनों में ईरान के कई प्रमुख शहरों—तेहरान, शिराज और तबरीज़—पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हैं। इजराइली सेना का कहना है कि इन हमलों का लक्ष्य ईरान के सैन्य ढांचे, मिसाइल ठिकानों और रक्षा प्रणाली को कमजोर करना है।

दूसरी ओर ईरान भी लगातार जवाबी कार्रवाई कर रहा है। हाल ही में खाड़ी क्षेत्र में कई ड्रोन और मिसाइल हमलों की खबरें सामने आई हैं। संयुक्त अरब अमीरात के दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास एक ड्रोन हमले में ईंधन टैंक में आग लग गई, जिसके कारण कुछ समय के लिए उड़ानें रोकनी पड़ीं। हालांकि शुरुआती रिपोर्टों में किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस घटना से पूरे क्षेत्र में दहशत फैल गई और विमान सेवाओं पर भी असर पड़ा।

खाड़ी देशों में भी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। सऊदी अरब, बहरीन और यूएई जैसे देशों ने बताया कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम कई मिसाइलों और ड्रोन को मार गिराने में लगे हुए हैं। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका और इजराइल अपने हमले नहीं रोकते, तो वह पूरे क्षेत्र में अपने हमले और तेज कर सकता है। इसी कारण खाड़ी देशों ने अपने प्रमुख बंदरगाहों और तेल ठिकानों की सुरक्षा बढ़ा दी है।

इस युद्ध का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ रहा है। रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है और तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। ईरान ने कहा है कि यह समुद्री मार्ग पूरी तरह बंद नहीं है, लेकिन “दुश्मनों” और उनके सहयोगियों के लिए इसे नियंत्रित किया जा सकता है। इस स्थिति ने दुनिया भर के देशों को चिंतित कर दिया है, क्योंकि दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी रास्ते से गुजरता है।

अमेरिका में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सहयोगी देशों से अपील की है कि वे इस जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए नौसैनिक गठबंधन बनाएं। हालांकि कई यूरोपीय देशों ने इस प्रस्ताव पर सावधानी बरतते हुए सीधे सैन्य हस्तक्षेप से दूरी बनाई है। ब्रिटेन सहित कुछ देशों ने साफ कहा है कि वे इस युद्ध में शामिल नहीं होना चाहते और कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देते हैं।

इस बीच इजराइल ने संकेत दिया है कि वह ईरान समर्थित संगठनों के खिलाफ भी कार्रवाई जारी रखेगा। लेबनान में हिज़्बुल्लाह के ठिकानों पर इजराइली हमलों के कारण बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं और कई लोगों की मौत की खबरें सामने आई हैं। लगातार बढ़ते इस संघर्ष ने पूरे पश्चिम एशिया को अस्थिर कर दिया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय युद्ध को रोकने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज करने की अपील कर रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह युद्ध लंबा खिंचता है तो इसका असर केवल मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या कूटनीतिक बातचीत के जरिए इस बढ़ते संघर्ष को रोका जा सकेगा या फिर यह जंग और बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकती है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
YouTube
LinkedIn
Share