मिडिल ईस्ट में जारी इजरायल-ईरान युद्ध अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। हाल ही में ईरान ने इजरायल के दक्षिणी शहर डिमोना पर मिसाइल हमला किया, जिसे लंबे समय से देश का सबसे सुरक्षित और संवेदनशील शहर माना जाता रहा है। इस हमले में कई लोग घायल हुए और यह घटना इसलिए भी अहम बन गई क्योंकि डिमोना इजरायल के परमाणु कार्यक्रम का केंद्र माना जाता है।
डिमोना को सुरक्षित शहर इसलिए माना जाता था क्योंकि यहां स्थित है शिमोन पेरेस नेगेव न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर, जो इजरायल के परमाणु कार्यक्रम की रीढ़ माना जाता है। यह अत्यंत गोपनीय और हाई-सिक्योरिटी जोन में आता है, जहां कड़ी सुरक्षा व्यवस्था, एयर डिफेंस सिस्टम और सैन्य निगरानी लगातार सक्रिय रहती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इजरायल ने इस परमाणु केंद्र को जानबूझकर रेगिस्तानी इलाके में बसाया ताकि यह बड़े शहरों से दूर रहे और किसी भी हमले की स्थिति में नुकसान सीमित रहे। इसके अलावा यहां अत्याधुनिक मिसाइल रक्षा प्रणाली भी तैनात रहती है, जिसके कारण इसे “सबसे सुरक्षित शहर” माना जाता था।
हालांकि, हालिया हमले ने इस धारणा को झटका दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने डिमोना और उसके आसपास के इलाकों को निशाना बनाकर यह संदेश दिया कि वह इजरायल के सबसे सुरक्षित और संवेदनशील ठिकानों तक भी पहुंच सकता है।
यह हमला उस समय हुआ जब अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के परमाणु ठिकानों, खासकर नतांज (Natanz) पर हमले की खबरें सामने आई थीं। इसके जवाब में ईरान ने सीधे इजरायल के परमाणु केंद्र के पास हमला कर दिया, जिससे यह संघर्ष और अधिक खतरनाक हो गया है।
डिमोना एक और वजह से चर्चा में रहता है—इसे “लिटिल इंडिया” भी कहा जाता है, क्योंकि यहां बड़ी संख्या में भारतीय मूल के यहूदी रहते हैं। यह शहर न केवल रणनीतिक बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी खास महत्व रखता है।
इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि अब यह संघर्ष केवल सीमित सैन्य कार्रवाई नहीं रह गया, बल्कि दोनों देशों के सबसे संवेदनशील और रणनीतिक ठिकाने सीधे निशाने पर आ चुके हैं। यदि हालात ऐसे ही बने रहे, तो यह टकराव बड़े क्षेत्रीय या वैश्विक संकट में बदल सकता है।
