Site icon Prsd News

ईरान के खिलाफ जंग सही दिशा में, लेकिन अभी बहुत कुछ बाकी: भारत में इजराइल के राजदूत का बड़ा बयान

69b5596e7afc4 reuven azar india today conclave 144944938 16x9 1

भारत में इजराइल के राजदूत Reuven Azar ने ईरान के साथ जारी युद्ध को लेकर बड़ा बयान दिया है। नई दिल्ली में आयोजित India Today Conclave 2026 के दौरान उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजराइल द्वारा चलाया जा रहा सैन्य अभियान सही दिशा में आगे बढ़ रहा है और इससे ईरान की सैन्य क्षमताओं को काफी हद तक कमजोर कर दिया गया है। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि युद्ध के लक्ष्य अभी पूरी तरह हासिल नहीं हुए हैं और आगे भी कार्रवाई जारी रह सकती है।

राजदूत रियुवेन अजार के अनुसार, इस सैन्य अभियान का मुख्य उद्देश्य ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और उसके परमाणु हथियार कार्यक्रम को खत्म करना है। उन्होंने दावा किया कि अब तक संयुक्त सैन्य कार्रवाई में ईरान के हजारों सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जा चुका है और इससे उसकी हमले करने की क्षमता पर बड़ा असर पड़ा है। उनका कहना था कि ईरान ने बड़े पैमाने पर मिसाइलों का भंडार तैयार करने की योजना बनाई थी, जो क्षेत्र के कई देशों के लिए खतरा बन सकता था।

उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध के दौरान शुरुआत में ईरान की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमले ज्यादा तीव्र थे, लेकिन अब उनकी ताकत पहले के मुकाबले कम हो गई है। पहले जहां ईरान के हमलों से इजराइल में कई इमारतें तबाह हुई थीं, वहीं अब हमलों से होने वाला नुकसान अपेक्षाकृत कम हो गया है। इसके बावजूद इजराइल में लोगों को सुरक्षा कारणों से अक्सर बंकरों और शेल्टर में जाना पड़ता है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि खतरा अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

इस दौरान अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप को लेकर भी सवाल उठे। खार्ग द्वीप और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे रणनीतिक इलाकों में अमेरिकी सेना की संभावित तैनाती पर अजार ने कहा कि यदि समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए जरूरत पड़ी तो अमेरिका सैन्य बल भेजने का फैसला कर सकता है, लेकिन इसका अंतिम निर्णय अमेरिकी राष्ट्रपति पर निर्भर करेगा।

गौरतलब है कि मध्य-पूर्व में चल रहा यह संघर्ष वैश्विक राजनीति और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। इजराइल और अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई ईरान के परमाणु और मिसाइल खतरे को रोकने के लिए जरूरी है, जबकि ईरान लगातार इन हमलों का जवाब दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह टकराव लंबा खिंचता है तो इसका असर पूरी दुनिया की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

Exit mobile version