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मध्य-पूर्व में तनाव का नया दौर: अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच जंग, यूएई-दुबई तक मिसाइल दहशत

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मध्य-पूर्व की राजनीति इस समय अभूतपूर्व तनाव की चपेट में है, जहाँ संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल तथा ईरान के बीच सैन्य संघर्ष ने एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष का रूप ले लिया है। यह युद्ध 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ जब अमेरिका और इज़राइल ने मिलकर ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों और सैन्य नेतृत्व पर हवाई हमले किए, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई को लक्षित कर मार गिराने का दावा भी किया गया है, जिससे विवाद और भड़का है।

संघर्ष शुरू होने के बाद ईरान ने भी कड़ा जवाब दिया और उसने खाड़ी क्षेत्र में स्थित कई देशों विशेषकर यूएई, दुबई और कुवैत की ओर सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलें तथा ड्रोन हमले के रूप में छोड़े। यूएई के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि उसने 186 बैलिस्टिक मिसाइलों में से अधिकांश को नष्ट कर दिया है तथा 800 से ज्यादा ड्रोन को इंटरसेप्ट किया है, हालांकि एक मिसाइल यूएई क्षेत्र में गिरा, जिससे मामूली नुकसान और कुछ नागरिक व विदेशी श्रमिकों के घायल होने की खबरें आई हैं।

तीव्र संघर्ष के बीच, तेहरान और अन्य ईरानी शहरों में लगातार धमाके सुनाई दिए, जिससे आम लोगों में भय और असुरक्षा की स्थिति पैदा हो गई है। अमेरिका-इज़राइल की संयुक्त स्ट्राइक्स से ईरान के सैन्य ठिकानों, एयरबेस और मिसाइल सुविधाओं को निशाना बनाया जा रहा है, वहीं ईरान ने भी अमेरिकी ठिकानों और समेत कई गॉल्फ देशों में अपने जवाबी हमले जारी रखे हैं।

संघर्ष के राजनीतिक आयाम भी गंभीर हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि यह जंग कई हफ्तों तक जारी रह सकती है और अमेरिका के पास व्यापक सैन्य क्षमताएँ हैं, जबकि इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मिसाइल खतरों को कमजोर करने के लिए अपने अभियान का बचाव किया है और कहा है कि वे अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे।

मध्य-पूर्व के अन्य देशों पर भी इस जंग का गहरा असर पड़ा है। सऊदी अरब और कतर जैसी प्रमुख तेल उत्पादक देशों की तेल रिफ़ाइनरीज़ पर अस्थायी बंदी लगने जैसी आर्थिक चुनौतियाँ सामने आईं हैं और कच्चा तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया है।

युद्ध की इस स्थिति ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता और निंदा दोनों को जन्म दिया है। कई विकासशील देशों और वैश्विक दक्षिण के नेताओं ने अमेरिका-इज़राइल की इस सैन्य कार्रवाई की आलोचना की है तथा इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों और कूटनीतिक समाधानों को दरकिनार करने वाली बताया है।

स्थिति अब भी अत्यंत अस्थिर बनी हुई है, और आम नागरिकों के बचाव, यात्रा सुरक्षा, और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर वैश्विक स्तर पर कई देशों ने चेतावनी जारी की है। यह संघर्ष केवल क्षेत्रीय नहीं रह गया है बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा नीति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा समीकरणों को भी प्रभावित कर रहा है।

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