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जामिया यूनिवर्सिटी की दीवारों पर ‘फ्री कश्मीर’ के नारे, शरजील इमाम की रिहाई की मांग से विवाद

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दिल्ली स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय परिसर की दीवारों पर ‘फ्री कश्मीर’ और ‘फ्री शरजील इमाम’ जैसे नारे लिखे मिलने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। सामने आई तस्वीरों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और विश्वविद्यालय के कुलपति के खिलाफ भी नारे लिखे होने की बात सामने आई है। हालांकि, इन नारों को किसने लिखा और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं, इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब विश्वविद्यालय परिसर में छात्र संघ चुनाव कराने की मांग को लेकर छात्रों का आंदोलन जारी है। दीवारों पर लिखे नारों को लेकर अलग-अलग छात्र संगठनों की प्रतिक्रिया सामने आई है। वहीं, इस मामले में नारों के पीछे जिम्मेदार लोगों की पहचान और विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

दीवारों पर लिखे मिले कई तरह के नारे

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 22 अक्टूबर को सामने आई तस्वीरों में विश्वविद्यालय की दीवारों पर नीले और लाल रंग से नारे लिखे दिखाई दिए। इनमें ‘फ्री कश्मीर’, ‘फ्री शरजील इमाम’, ‘RSS Go Back’ और ‘VC Go Back’ जैसे संदेश शामिल बताए गए हैं। इन नारों की तस्वीरें सामने आने के बाद परिसर में मामला चर्चा का विषय बन गया।

रिपोर्टों के मुताबिक, दीवारों पर लिखे कुछ नारों को बाद में मिटा दिया गया। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इन्हें किसने लिखा था और क्या इनका छात्र संघ चुनाव को लेकर चल रहे आंदोलन से कोई सीधा संबंध है। ऐसे में किसी संगठन या व्यक्ति को इसके लिए जिम्मेदार ठहराने से पहले आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।

छात्र संघ चुनाव की मांग को लेकर आंदोलन जारी

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव कराने की मांग को लेकर छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों का संगठन यूनाइटेड स्टूडेंट्स ऑफ जामिया मौजूदा शैक्षणिक सत्र के लिए चुनाव की तारीख घोषित करने की मांग कर रहा है।

रिपोर्टों के अनुसार, छात्र संघ चुनाव की मांग को लेकर छात्रों की भूख हड़ताल 23 अक्टूबर को तीसरे दिन भी जारी थी। प्रदर्शनकारी विश्वविद्यालय प्रशासन से चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और छात्र प्रतिनिधित्व बहाल करने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा, कुछ छात्रों के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने तथा विश्वविद्यालय के कुछ अधिकारियों को हटाने की मांग भी उठाई गई है।

छात्रों और प्रशासन के बीच बातचीत से समाधान की कोशिश

छात्रों की मांगों पर विचार करने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने सात सदस्यीय समिति गठित की थी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, समिति और छात्र प्रतिनिधियों के बीच बातचीत भी हुई, लेकिन आंदोलन समाप्त कराने को लेकर सहमति नहीं बन पाई।

छात्रों का आरोप है कि चुनाव कराने के बजाय छात्र संघ के संविधान की तैयारी के लिए समिति गठित करने से प्रक्रिया में देरी हो रही है। दूसरी ओर, प्रशासन की ओर से छात्र संघ के गठन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए संविधान तैयार करने पर काम किए जाने की जानकारी सामने आई है।

नारों को लेकर छात्र संगठनों ने जताई आपत्ति

दीवारों पर लिखे नारों को लेकर छात्र संगठनों की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने इन नारों पर आपत्ति जताते हुए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर कार्रवाई करने की मांग की है।

हालांकि, नारों को लिखने वालों की पहचान अभी स्पष्ट नहीं है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया और दिल्ली पुलिस में शिकायत की स्थिति की भी पुष्टि आवश्यक है। इसलिए फिलहाल इस घटना को लेकर किसी व्यक्ति या संगठन की भूमिका के बारे में निश्चित दावा करना उचित नहीं होगा।

शरजील इमाम का नाम फिर चर्चा में

दीवारों पर ‘फ्री शरजील इमाम’ लिखे होने की खबर के बाद शरजील इमाम का नाम भी चर्चा में आ गया है। वह नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ 2019-20 के प्रदर्शनों के दौरान चर्चा में आए थे और उनके खिलाफ दर्ज मामलों की कानूनी प्रक्रिया अदालतों में जारी है। किसी भी मामले में आरोप और अदालत द्वारा दोष सिद्ध किया जाना अलग-अलग बातें हैं।

फिलहाल, जामिया परिसर में दीवारों पर लिखे नारों और छात्र संघ चुनाव की मांग को लेकर जारी आंदोलन, दोनों घटनाक्रम चर्चा में हैं। अब मामले में जिम्मेदार लोगों की पहचान, विश्वविद्यालय प्रशासन की प्रतिक्रिया और छात्रों की मांगों पर आगे होने वाली कार्रवाई पर नजर रहेगी।

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