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जम्मू-कश्मीर के डोडा में बड़ा हादसा: भद्रवाह-चंबा रोड पर सेना का बख्तरबंद वाहन खाई में गिरा, 10 जवान शहीद; कई घायल

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जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले से गुरुवार 22 जनवरी 2026 को एक बेहद दुखद खबर सामने आई, जहां भारतीय सेना का वाहन पहाड़ी रास्ते पर फिसलकर गहरी खाई में जा गिरा। इस भीषण सड़क हादसे में 10 जवानों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य जवान घायल बताए जा रहे हैं। हादसा भद्रवाह–चंबा इंटर-स्टेट रोड पर खन्नी टॉप (Khanni Top) के पास हुआ, जो ऊंचाई और खतरनाक मोड़ों के लिए जाना जाता है।

ऑपरेशन के लिए जा रहा था वाहन, रास्ते में पलटी किस्मत

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह बुलेटप्रूफ/आर्मर्ड सेना वाहन (Casspir) जवानों को लेकर एक ऑपरेशन के लिए जा रहा था। इसी दौरान दुर्गम इलाके में वाहन का संतुलन बिगड़ा और वह सड़क से नीचे उतरते हुए खाई में गिर गया। शुरुआती जानकारी में बताया गया कि हादसा इतना भीषण था कि कुछ जवानों की मौके पर ही जान चली गई, जबकि अन्य गंभीर रूप से घायल हुए और बाद में कुछ ने दम तोड़ा।

ऊंचाई, दुर्गम रास्ता और मौसम—हर कदम पर जोखिम

स्थानीय भौगोलिक स्थिति के लिहाज से डोडा-भद्रवाह बेल्ट का यह इलाका बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है। करीब 9,000 फीट ऊंचाई वाले खन्नी टॉप के आसपास रास्ते संकरे, घुमावदार और कई जगह ढलान वाले हैं—जहां हल्की सी चूक भी बड़ी दुर्घटना में बदल सकती है। कुछ रिपोर्ट्स में खराब मौसम और दुर्गम टेरेन का भी संदर्भ आया है, जो हादसे के जोखिम को बढ़ाते हैं।

तुरंत शुरू हुआ संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन

हादसे के बाद सेना और स्थानीय पुलिस की टीमों ने मिलकर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। पहाड़ों में खाई तक पहुंचना आसान नहीं होता—फिर भी बचाव दल ने तेजी से कार्रवाई करते हुए घायलों को बाहर निकालकर उपचार के लिए भेजा। कुछ रिपोर्ट्स में घायलों को सैन्य चिकित्सा व्यवस्था के जरिए आगे रेफर किए जाने का भी उल्लेख है।

पीएम मोदी समेत नेताओं ने जताया शोक

इस हादसे पर देशभर में शोक की लहर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जवानों की शहादत पर दुख जताते हुए उनके परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की। कई अन्य नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने भी इस त्रासदी पर अफसोस जताया और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।

सवाल जो उठ रहे हैं: कारण क्या था?

फिलहाल हादसे के सटीक कारण को लेकर आधिकारिक जांच/तकनीकी आकलन की जरूरत बताई जा रही है। ऐसे मामलों में आमतौर पर यह देखा जाता है कि:

इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही साफ होंगे, लेकिन इतना तय है कि यह दुर्घटना पहाड़ी इलाकों में तैनात बलों के सामने मौजूद जोखिम को फिर से रेखांकित करती है।

देश के लिए भारी क्षति

देश की सुरक्षा में तैनात जवानों की इस तरह की असमय मौत केवल एक “सड़क हादसा” नहीं रह जाती—यह परिवारों के लिए जीवनभर का दर्द और राष्ट्र के लिए अपूरणीय क्षति बन जाती है। डोडा की इस घटना ने एक बार फिर याद दिलाया कि सीमाई/पहाड़ी इलाकों में ड्यूटी केवल दुश्मन से नहीं, बल्कि भूगोल और मौसम से भी रोज़ की लड़ाई है।

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