नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा आंदोलन एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का केंद्र बन गया है। क्लाइमेट एक्टिविस्ट और शिक्षा सुधारों के समर्थक सोनम वांगचुक के लंबे समय तक चले अनशन के बाद उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन इसके बावजूद आंदोलन थमता नजर नहीं आ रहा है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सीजेपी (CJP) के प्रमुख अभिजीत दिपके ने केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकार छात्रों और युवाओं की चिंताओं को गंभीरता से नहीं ले रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री से सीधे जवाब मांगते हुए कहा कि देश को यह बताया जाना चाहिए कि लगातार उठ रहे विरोध और छात्र हितों से जुड़े विवादों के बावजूद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे समर्थकों का कहना है कि यह आंदोलन केवल किसी एक व्यक्ति या संगठन का नहीं, बल्कि देशभर के उन छात्रों और युवाओं की आवाज है जो शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, परीक्षा प्रणाली में सुधार और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कई महत्वपूर्ण परीक्षाओं में सामने आई अनियमितताओं ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है। इसी मुद्दे को लेकर सोनम वांगचुक ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी, जिसने देशभर में व्यापक समर्थन हासिल किया।
अभिजीत दिपके ने कहा कि सोनम वांगचुक को अस्पताल भेजे जाने के बाद भी आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर सरकार की ओर से ठोस और सार्वजनिक आश्वासन नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। दिपके ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार बातचीत की पहल तो करती है, लेकिन समानांतर रूप से प्रदर्शनकारियों पर दबाव बनाने की कोशिश भी की जा रही है, जिससे आंदोलनकारियों में अविश्वास का माहौल बना है।
उधर, सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर लगातार चिंता जताई जा रही है। अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद उनके समर्थकों का कहना है कि उनकी ओर से शुरू किया गया संघर्ष अपने उद्देश्य से पीछे नहीं हटेगा। इस बीच उनकी पत्नी ने भी बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने और उनके स्वास्थ्य संबंधी निर्णयों में परिवार की सहमति को महत्व देने की बात कही है। दिल्ली हाई कोर्ट में भी इस पूरे मामले को लेकर सुनवाई हुई, जहां अस्पताल में भर्ती किए जाने की परिस्थितियों और चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल उठाए गए।
राजधानी में जारी इस आंदोलन के चलते सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है। पुलिस प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है ताकि कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो। वहीं, विभिन्न छात्र संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिक समूहों का समर्थन आंदोलन को लगातार मिल रहा है। आंदोलनकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाना है और वे लोकतांत्रिक ढंग से अपनी आवाज बुलंद करते रहेंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस विवाद का समाधान जल्द नहीं निकला तो यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है। फिलहाल सभी की निगाहें केंद्र सरकार की अगली रणनीति, संभावित वार्ता और आंदोलनकारियों की आगामी घोषणा पर टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी बहस को और तेज कर सकता है।
