
महाराष्ट्र में हाल के नगर निकाय चुनाव के परिणामों के बाद राज्य की राजनीति में विपक्षी दलों के बीच तकरार देखने को मिली है। चुनाव परिणामों में महायुति (BJP-Shiv Sena-UBT/NCP समर्थन) ने ज़ोरदार प्रदर्शन किया, जबकि महाविकास अघाड़ी (MVA) एवं कांग्रेस का प्रदर्शन अपेक्षित रूप में कमजोर रहा। इस पर शिवसेना (UBT) के नेता आनंद दुबे ने कांग्रेस को निशाना बनाते हुए कहा कि मुंबई में कांग्रेस पार्टी को गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं, क्योंकि पिछले 30 वर्षों से कांग्रेस मुंबई नगर निगम (BMC) चुनाव नहीं जीत पाई है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस “मुंबई में टूरिस्ट की तरह आती है, होर्डिंग लगाती है, चुनाव लड़ती है फिर हारकर चली जाती है।”
आनंद दुबे ने यह भी कहा कि मुंबई का राजनीतिक रिश्ता हमेशा शिवसेना से रहा है और उनका विश्वास है कि 16 जनवरी 2026 को BMC चुनाव में फिर जीत होगी। उन्होंने महाविकास अघाड़ी गठबंधन का ज़िक्र करते हुए कहा कि उनकी पार्टी और साथी पार्टी मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं।
इन चुनाव परिणामों और बयानबाज़ी ने यह स्पष्ट किया है कि स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजे न केवल जनहित मुद्दों पर आधारित रहे, बल्कि राजनीतिक गठबंधनों और रणनीतियों पर भी अहम प्रभाव डाल रहे हैं। विशेष रूप से BMC चुनाव की ओर बढ़ते हुए, राजनीतिक दलों की तैयारियों और गठबंधनों का आकार अभी भी निरंतर बदल रहा है।



