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Janata Dal (United) ने बिहार विधानसभा चुनाव-पूर्व बड़ा शिकंजा कसते हुए 11 नेताओं को पार्टी से निष्कासित किया

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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के माहौल में, जेडीयू ने अपने भीतर अनुशासन और संगठनात्मक मुस्तैदी का एक स्पष्ट संदेश दिया है। पार्टी ने सोमवार को 11 नेताओं को पार्टी से निष्कासित कर दिया है, जिनमें 4 पूर्व विधायक (former MLAs) भी शामिल हैं।

यह कदम उस समय उठाया गया है जब जेडीयू राज्यों में आगामी राजनीतिक मुकाबले की तैयारी कर रही है और संगठनात्मक रूप से कड़ी कार्रवाई को प्राथमिकता दे रही है। निष्कासन के पीछे “एंटी-पार्टी गतिविधियों” या संगठन के हित के विरुद्ध काम करने का आरोप बताया गया है।

निर्णय में शामिल नेताओं के नाम भी सामने आए हैं — इनमें पूर्व मंत्री शैलेश कुमार, पूर्व विधान पार्षद संजय प्रसाद, पूर्व विधायक श्याम बहादुर सिंह, पूर्व विधान पार्षद रणविजय सिंह, पूर्व विधायक सुदर्शन कुमार, अमर कुमार सिंह आदि का नाम लिया गया है।

पार्टी प्रवक्ता का कहना है कि चुनाव-पूर्व इस तरह की कार्रवाई संगठन को सुदृढ़ बनाने, संभावित बैठकों एवं टिकट वितरण में दुर्घटना से बचने तथा नेता-पदाधिकारियों को जवाबदेह बनाने की दिशा में है। इस कार्रवाई को विपक्षी दलों द्वारा पार्टी के भीतर चल रही नाखुशी या “बगावत के बीज” रोके जाने के रूप में देखा जा रहा है।

विश्लेषकों के अनुसार, इस तरह का कड़ा कदम यह संकेत देता है कि जेडीयू ‘अनुशासनहीनता’ पर आंख बंद नहीं कर रही; विशेष रूप से ऐसे समय में जब सीटें तय हो रही हैं, उम्मीदवार चयन हो रहा है और गठबंधनों-सेटिंग चल रही है। संगठन अपने धार्मिक, जातीय व सामाजिक समीकरणों को और मजबूत बनाना चाहता है।

हालाँकि, यह भी देखा जाना बाकी है कि निष्कासित नेताओं की प्रतिक्रियाएँ क्या होंगी — क्या वे विरोध की ओर मुड़ेंगे, या अन्य दलों से जुड़ेंगे। चुनावी क्षितिज में, इस तरह की अंदरूनी सफाई आगे चलकर पार्टी को कितना लाभ देती है, यह वक्त ही बताएगा।

यह घटना हमें यह भी बताती है कि राजनीतिक दलों के लिए सिर्फ चुनाव-प्रचार या गठबंधन काफी नहीं; चुनाव से पहले संगठनात्मक नियम-विनियम, स्थिरता, नेतृत्व-विकल्प और संसाधन-प्रबंधन पर भी काफी ध्यान देना पड़ रहा है।

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