जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय यानी JNU में छात्रों और प्रशासन के बीच विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। JNU छात्रसंघ के पदाधिकारियों समेत 17 छात्र 3 अक्टूबर से अपनी कई मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। छात्रों का कहना है कि उनकी मांगें केवल छात्र राजनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हॉस्टल, स्वास्थ्य सुविधाओं, कैंपस इंफ्रास्ट्रक्चर, छात्र प्रतिनिधित्व और शैक्षणिक व्यवस्था से जुड़े कई अहम मुद्दे भी इसमें शामिल हैं।
छात्रों की प्रमुख मांगों में Chief Proctor Office यानी CPO Manual को वापस लेना शामिल है। JNUSU का आरोप है कि इस मैनुअल के प्रावधान कैंपस में विरोध-प्रदर्शन और छात्रों की लोकतांत्रिक गतिविधियों को प्रभावित करते हैं। इसके अलावा छात्रसंघ के पदाधिकारियों पर लगाए गए रस्टिकेशन और आउट-ऑफ-बाउंड्स आदेशों को वापस लेने की भी मांग की जा रही है।
JNUSU ने Gender Sensitisation Committee Against Sexual Harassment यानी GSCASH को फिर से बहाल करने की मांग भी उठाई है। इसके साथ ही छात्रों ने कथित भर्ती अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच कराने और Equal Opportunity Cell को रोहित एक्ट के सिद्धांतों के अनुरूप मजबूत करने की मांग की है। छात्र संगठन JNU Entrance Examination यानी JNUEE को दोबारा शुरू करने की मांग भी कर रहा है।
भूख हड़ताल के पीछे छात्रों के कई बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दे भी हैं। छात्र संगठनों ने हॉस्टलों की स्थिति सुधारने, लाइब्रेरी में सीटों की संख्या बढ़ाने, खराब लिफ्टों को दुरुस्त करने और कैंपस की सड़कों की मरम्मत की मांग की है। कावेरी, पेरियार और गोदावरी हॉस्टल की सुविधाओं में सुधार के साथ बराक हॉस्टल में मेस और वाई-फाई व्यवस्था को बेहतर करने की मांग भी सामने आई है।
छात्रों की मांगों में JNU के स्टेडियम और Teflas के नवीनीकरण के अलावा जेंडर-न्यूट्रल वॉशरूम और हेल्थ सेंटर में सुधार भी शामिल है। इसके अलावा मेस बिलों का ऑडिट कराने, मेरिट-कम-मींस फेलोशिप की राशि बढ़ाने और इंजीनियरिंग छात्रों को भी इस योजना के दायरे में लाने की मांग की गई है। छात्र संगठन छात्र संघ के फंड को बहाल करने और संबंधित व्यवस्थाओं में पारदर्शिता की भी मांग कर रहा है।
JNUSU के मुताबिक, भूख हड़ताल शुरू होने से पहले भी छात्रों ने प्रशासन के सामने अपनी मांगें रखी थीं। 30 सितंबर को छात्र प्रतिनिधिमंडल ने कुलपति कार्यालय जाकर कई मुद्दों को उठाया था। छात्रों का कहना है कि बातचीत के जरिए समस्याओं का समाधान नहीं होने के बाद उन्हें अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा।
इस बीच छात्र संगठन ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर दबाव बनाने और आंदोलनकारियों को चेतावनी देने का आरोप लगाया है। JNUSU के अनुसार, चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर ने प्रदर्शन कर रहे पदाधिकारियों को चेतावनी दी कि आंदोलन जारी रखने पर उनके रस्टिकेशन की अवधि बढ़ाई जा सकती है। छात्रों ने इसे दबाव बनाने की कोशिश बताया है। वहीं, छात्रों का यह भी आरोप है कि भूख हड़ताल पर बैठे कुछ पदाधिकारियों का मेडिकल चेकअप नहीं कराया गया। ये आरोप छात्र संगठन की ओर से लगाए गए हैं और इन्हें लेकर प्रशासन का पक्ष भी महत्वपूर्ण है।
प्रशासन की ओर से यह कहा गया है कि जिन छात्रों पर आउट-ऑफ-बाउंड्स के आदेश लागू हैं, वे विश्वविद्यालय में पंजीकृत छात्रों के तौर पर प्रदर्शन स्थल पर बैठने के हकदार नहीं हैं। सुरक्षा अधिकारी ने कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों को अनुशासनात्मक कार्रवाई की संभावना को लेकर भी आगाह किया। इस बीच कुलपति के अस्वस्थ होने के कारण उनसे तत्काल मुलाकात नहीं हो पाने की बात भी सामने आई है।
JNU परिसर में इसी समय छात्रों का एक दूसरा आंदोलन भी चल रहा है। ABVP से जुड़े छात्र 30 सितंबर से हेल्थ सेंटर की सुविधाओं और कथित कुप्रबंधन को लेकर अलग से अनिश्चितकालीन प्रदर्शन कर रहे हैं। इस समूह ने कैंपस में बेहतर मेडिकल सुविधाओं के साथ प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र शुरू करने की मांग भी उठाई है। इससे JNU में छात्र सुविधाओं को लेकर अलग-अलग संगठनों की ओर से चल रहे आंदोलनों की तस्वीर सामने आती है।
फिलहाल JNUSU का कहना है कि जब तक उसकी प्रमुख मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, भूख हड़ताल जारी रहेगी। दूसरी तरफ विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्रों के बीच बातचीत से समाधान निकलने का इंतजार है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि CPO Manual, रस्टिकेशन, GSCASH और कैंपस की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े इन मुद्दों पर प्रशासन क्या कदम उठाता है और क्या दोनों पक्षों के बीच बातचीत से आंदोलन खत्म कराने का रास्ता निकल पाता है।
