झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रही जांच के बीच आयोग के 3 सदस्यों के इस्तीफे से मामला और गंभीर हो गया है। आयोग के सदस्य डॉ. अजीता भट्टाचार्य, डॉ. अनीमा हंसदा और डॉ. जमाल अहमद ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब झारखंड CID ने इन तीनों सदस्यों को पूछताछ के लिए तलब किया था। CID की जांच मुख्य रूप से 14वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा से जुड़ी कथित गड़बड़ियों और परीक्षा प्रक्रिया में सामने आए सवालों पर केंद्रित है।
रिपोर्टों के अनुसार, तीनों सदस्यों को अलग-अलग पूछताछ के लिए CID के सामने पेश होने को कहा गया था। जांच एजेंसी परीक्षा के आयोजन, प्रश्नपत्र, मूल्यांकन प्रक्रिया और भर्ती से जुड़े फैसलों के संबंध में उनसे जानकारी हासिल करना चाहती थी। इससे पहले JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांगते से भी CID कई दौर की पूछताछ कर चुकी है। खियांगते ने जुलाई में अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था और इसके बाद जांच एजेंसी ने उनसे परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर पूछताछ की।
JPSC विवाद की शुरुआत परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर अभ्यर्थियों की ओर से उठाए गए सवालों के बाद तेज हुई। छात्रों का आरोप है कि राज्य की प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। इसी मुद्दे को लेकर रांची समेत झारखंड के कई हिस्सों में अभ्यर्थियों का आंदोलन चल रहा है। प्रदर्शनकारी 14वीं JPSC परीक्षा समेत अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। कई छात्र संगठनों ने मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग भी उठाई है।
CID की कार्रवाई के बीच जांच का दायरा लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। जांच एजेंसी ने कथित भर्ती घोटाले से जुड़े कई लोगों को गिरफ्तार किया है और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े अलग-अलग पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कथित अनियमितताएं किस स्तर पर हुईं और इसमें किन लोगों की भूमिका रही। पूर्व JPSC अध्यक्ष से लगातार पूछताछ और आयोग के मौजूदा सदस्यों को तलब किए जाने के बाद अब 3 सदस्यों का इस्तीफा इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
इस पूरे प्रकरण का असर झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हजारों अभ्यर्थियों पर भी पड़ रहा है। प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले युवाओं के लिए परीक्षा की तारीख, परिणाम और चयन प्रक्रिया से जुड़ी अनिश्चितता बड़ी चिंता का विषय बन गई है। छात्रों का कहना है कि सरकारी भर्ती प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी का सीधा असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ता है जो वर्षों तक मेहनत करके परीक्षा की तैयारी करते हैं। यही वजह है कि आंदोलन लगातार तेज होता गया है और अभ्यर्थी जांच के साथ-साथ भर्ती व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग कर रहे हैं।
इसी बीच झारखंड सरकार और आंदोलन कर रहे छात्रों के बीच बातचीत का दौर भी जारी है। सरकार की ओर से छात्रों की शिकायतों पर चर्चा करने के लिए बातचीत की जा रही है, हालांकि प्रदर्शनकारी ठोस कार्रवाई होने तक अपना आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं। सरकार ने भी परीक्षा प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों के बीच जांच और सुधार की दिशा में कदम उठाने के संकेत दिए हैं।
JPSC के 3 सदस्यों का इस्तीफा ऐसे वक्त में हुआ है जब CID की पूछताछ शुरू होने वाली थी, इसलिए इस घटनाक्रम ने जांच को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दिया है। हालांकि, केवल इस्तीफा दिए जाने को किसी सदस्य की दोषी होने की पुष्टि के तौर पर नहीं देखा जा सकता। वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने और संबंधित तथ्यों के सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल CID की जांच, छात्रों का आंदोलन और JPSC की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों ने झारखंड की भर्ती व्यवस्था को लेकर गंभीर बहस खड़ी कर दी है।
