झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच राज्य की अपराध जांच विभाग (CID) ने बड़ी कार्रवाई की है। JPSC के पूर्व चेयरमैन एल. खियांग्ते को गिरफ्तार कर लिया गया है। यह गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है जब रांची में बड़ी संख्या में छात्र भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और गड़बड़ियों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं और सोमवार को विधानसभा घेराव के लिए मार्च निकाल रहे हैं। NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, CID को जांच के दौरान कुछ महत्वपूर्ण सबूत मिले हैं, जिसके बाद पूर्व चेयरमैन के खिलाफ यह कार्रवाई की गई।
एल. खियांग्ते के खिलाफ कार्रवाई JPSC की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच के सिलसिले में हुई है। इस मामले में CID पहले से ही जांच कर रही थी और खियांग्ते से कई दौर में पूछताछ भी की जा चुकी थी। इससे पहले 28 जुलाई को उनसे करीब 9 घंटे तक पूछताछ हुई थी। इसके बाद 29 जुलाई और 31 जुलाई को भी उनसे पूछताछ की गई, जबकि 3 अगस्त को उनसे करीब 7 घंटे तक सवाल-जवाब किए गए। जांच के दौरान CID ने कई स्थानों पर छापेमारी कर दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, अभ्यर्थियों से संबंधित रिकॉर्ड और अन्य सामग्री भी बरामद करने की बात कही थी।
खियांग्ते ने 22 जुलाई को JPSC के चेयरमैन पद से इस्तीफा दिया था। उनके इस्तीफे के अगले दिन CID ने उनके आधिकारिक आवास समेत कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। बाद में उन्होंने कहा था कि उन्होंने निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए स्वेच्छा से पद छोड़ने का फैसला किया। खियांग्ते इससे पहले झारखंड के मुख्य सचिव रह चुके हैं और फरवरी 2025 में उन्हें JPSC का चेयरमैन नियुक्त किया गया था।
JPSC परीक्षा विवाद की जांच में इससे पहले भी कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। 22 जुलाई को CID ने JPSC के डिप्टी कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन श्वेता कुमारी गुप्ता, TSR Data Processing Private Limited के निदेशक रामवीर सिंह समेत 5 लोगों को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी ने इन लोगों के खिलाफ प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के संबंध में मामला दर्ज किया था। इसके बाद जांच का दायरा लगातार बढ़ता गया और कई अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया गया।
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि CID ने जांच के दौरान झारखंड के कई जिलों में एक साथ छापेमारी की। इन कार्रवाइयों में रांची, पलामू, हजारीबाग, बोकारो और धनबाद समेत कई स्थान शामिल रहे। जांच एजेंसी के मुताबिक, तलाशी के दौरान लैपटॉप और मोबाइल फोन जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के अलावा बैंक पासबुक, चेकबुक, अभ्यर्थियों की OMR शीट की कार्बन कॉपी, एडमिट कार्ड और मार्कशीट जैसे दस्तावेज भी मिले।
इधर, भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्रों का आंदोलन भी लगातार तेज हो रहा है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और कथित अनियमितताओं ने हजारों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है। छात्र इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं। कई प्रदर्शनकारी राज्य की जांच एजेंसी के बजाय केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग भी उठा रहे हैं। सरकार और छात्रों के बीच इस मुद्दे पर अभी पूरी तरह सहमति नहीं बन पाई है।
सोमवार को छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर विधानसभा की ओर मार्च किया। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए प्रशासन ने बैरिकेडिंग की थी। मार्च के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हुई और पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई करनी पड़ी। ऐसे माहौल में पूर्व JPSC चेयरमैन की गिरफ्तारी ने पूरे मामले को और महत्वपूर्ण बना दिया है। छात्रों के आंदोलन के बीच हुई इस कार्रवाई से अब यह उम्मीद बढ़ी है कि जांच में आगे भी कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं।
इस पूरे घटनाक्रम का असर JPSC की भर्ती प्रक्रिया पर भी पड़ा है। कथित अनियमितताओं की जांच के बीच JPSC ने संयुक्त सिविल सेवा मुख्य परीक्षा को भी स्थगित कर दिया था। वहीं, छात्रों का दबाव सरकार और आयोग पर लगातार बढ़ रहा है। रविवार को JPSC के 3 सदस्यों के इस्तीफे की खबर भी सामने आई थी, जिससे विवाद और गहरा गया है।
फिलहाल एल. खियांग्ते की गिरफ्तारी को JPSC परीक्षा विवाद की जांच में CID की अब तक की सबसे महत्वपूर्ण कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है। हालांकि, गिरफ्तारी अपने आप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है और मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही सामने आएगा। आने वाले दिनों में CID की जांच, छात्रों की मांगों और सरकार के साथ उनकी बातचीत पर पूरे झारखंड की नजर रहेगी।
