
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान में बिगड़ते हालात के बीच भारत सरकार ने वहां फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसी अभियान के तहत कश्मीर के मेडिकल छात्रों का पहला जत्था सुरक्षित रूप से ईरान से निकलकर आर्मेनिया पहुंच गया है। जानकारी के अनुसार अधिकांश छात्र उर्मिया और अन्य शहरों में पढ़ाई कर रहे थे और हालिया संघर्ष के कारण उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई थी। ऐसे में भारतीय दूतावास और छात्र संगठनों के समन्वय से उन्हें सुरक्षित निकालने की व्यवस्था की गई।
रिपोर्टों के मुताबिक इन छात्रों को पहले ईरान के विभिन्न शहरों से सड़क मार्ग के जरिए आर्मेनिया की सीमा तक लाया गया। सीमा पार करने के बाद उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया, जहां से आगे की यात्रा के लिए व्यवस्थाएं की गईं। बताया जा रहा है कि इन छात्रों को आर्मेनिया की राजधानी येरेवन से वाणिज्यिक उड़ानों के जरिए दुबई और फिर भारत भेजा गया। इस तरह के जटिल मार्ग के जरिए उन्हें युद्ध जैसे हालात वाले क्षेत्र से बाहर निकाला गया।
पहले चरण में करीब 70 से अधिक भारतीय छात्र—जिनमें ज्यादातर जम्मू-कश्मीर के हैं—सुरक्षित रूप से भारत लौट आए हैं और दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचे। छात्रों के सुरक्षित लौटने से उनके परिवारों और पूरे कश्मीर क्षेत्र में राहत की भावना देखी जा रही है। छात्र संगठनों ने बताया कि यह केवल शुरुआत है और अभी भी बड़ी संख्या में भारतीय छात्र ईरान के विभिन्न शहरों में मौजूद हैं।
जानकारों के अनुसार ईरान में हजारों भारतीय रहते हैं, जिनमें बड़ी संख्या मेडिकल और अन्य पेशेवर कोर्स कर रहे छात्रों की है। हाल के सैन्य तनाव और हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण सीधे उड़ानों से वापसी संभव नहीं थी, इसलिए भारत सरकार ने आर्मेनिया और अजरबैजान जैसे पड़ोसी देशों के रास्ते सुरक्षित निकासी की रणनीति अपनाई है। विदेश मंत्रालय और भारतीय मिशनों की मदद से यह पूरा अभियान चरणबद्ध तरीके से चलाया जा रहा है।
सरकार का कहना है कि जरूरत पड़ने पर और भी छात्रों तथा भारतीय नागरिकों को इसी तरह सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाकर वापस भारत लाया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्र में जारी संघर्ष को देखते हुए आने वाले दिनों में ऐसे और भी राहत अभियान चलाए जा सकते हैं, ताकि ईरान में फंसे भारतीयों को सुरक्षित घर लौटाया जा सके।
कुल मिलाकर ईरान संकट के बीच कश्मीरी छात्रों की सुरक्षित वापसी का यह पहला बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे न सिर्फ परिवारों को राहत मिली है, बल्कि यह भी संकेत मिला है कि भारत सरकार विदेशों में फंसे अपने नागरिकों को निकालने के लिए सक्रिय रूप से प्रयास कर रही है।


