
जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियों को एक बड़े आतंकवादी मॉड्यूल (terrorist module) का भेद करने में सफलता मिली है, जिसमें जैश-ए-मोहम्मद (JeM), लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और हिज्बुल मुजाहिदीन (HM) जैसे प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों के नेटवर्क का पता चला है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह मॉड्यूल सीमा के भीतर सक्रिय था और इसकी जड़ों से आतंकवादी गतिविधियों के कई तार जुड़े हुए पाए गए हैं।
सुरक्षा बलों की तरफ से यह जानकारी सामने आई है कि इन मॉड्यूल्स के सदस्य आतंकवाद को स्थानीय युवाओं और विदेशों से जोड़े गए नेटवर्क के जरिए फैलाने की कोशिश कर रहे थे। जांच टीमों ने रेडेज, हथियार, IED बनाने का भारी मात्रा में सामग्री, गोला-बारूद और तैयार शस्त्र बरामद किये हैं, जिससे पता चलता है कि यह नेटवर्क बड़े पैमाने पर आतंकवादी हमलों की साजिश रचने की योजना में शामिल था।
जम्मू-कश्मीर पुलिस के बयान में यह भी कहा गया है कि मॉड्यूल ने एन्क्रिप्टेड चैनलों का इस्तेमाल करके वित्तीय संचलन, भर्तियाँ और लॉजिस्टिक समन्वय किया। संगठन के सदस्यों का काम केवल हथियार जमा करना ही नहीं था, बल्कि वे स्थानीय व्यक्तियों को चरमपंथ की ओर प्रभावित भी कर रहे थे। जांच आगे चलाते हुए यह जानकारी मिली है कि यह नेटवर्क पाकिस्तान सहित विदेशी एजेंटों और हैंडलरों से भी जुड़ा हुआ था।
इस ऑपरेशन में पुलिस ने कई प्रमुख संलिप्त व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है जिनमें कश्मीर के नॉवगाम, श्रीनगर, पूलवामा, शोपियां और गांदरबल जैसे इलाकों के निवासी शामिल हैं। इसके अलावा सुरक्षा बलों ने चीन निर्मित स्टार पिस्तौल, AK-56 राइफल और कई अन्य हथियार भी जब्त किये हैं।
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक इन मॉड्यूल्स के सदस्य तार्किक रूप से फैले हुए थे और उन्होंने व्यावसायिक और शैक्षणिक नेटवर्क के माध्यम से आतंक के फायदे के लिए धन जुटाया। ऐसा पाया गया कि इसके लिए “सामाजिक और दान” उद्देश्यों के नाम पर फंड इकट्ठा किया जाता था, जिसे बाद में अवैध गतिविधियों में लगाया जाता था।
विशेष जांच दल (SIT) ने कहा है कि अनुसंधान पर ध्यान देकर और पुराने उग्रवादी मॉड्यूलों की पहचान कर, उन्होंने नेटवर्क को ट्रेस किया और मुख्य योजनाकारों को पकड़ने की दिशा में बड़ी प्रगति की है। सुरक्षा बलों का मानना है कि यह मॉड्यूल स्थानीय समर्थन के बिना नहीं सफल हो सकता था, इसलिए इसके कई सदस्य या तो स्थानीय थे या किसी बाहरी नेटवर्क से जुड़े थे।
पिछले वर्ष भी भारतीय सुरक्षा बलों ने ऑपरेशन सिंदूर जैसी बड़ी कार्रवाइयाँ चलायीं, जिसमें जैश, लेट और हिज्बुल मुजाहिदीन के ठिकानों पर हवाई और सुरक्षा बलों के निशाने साधे गए, ताकि इन संगठनों की क्षमता को कम किया जा सके। इन कार्रवाइयों का उद्देश्य आतंकवादी आधारों और प्रशिक्षण केंद्रों को ख़त्म करना था ताकि सुरक्षा स्थिति में सुधार आए।
विशेषज्ञों का कहना है कि जम्मू और कश्मीर में आतंकवादी मॉड्यूल के सक्रिय रहना इस क्षेत्र की सुरक्षा चुनौतियों को दर्शाता है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में आतंकी भर्ती और स्थानीय समर्थन में कमी आई है, लेकिन बाहरी नेटवर्क और भड़काऊ प्रचार के प्रयास अभी भी सक्रिय हैं, जिससे सुरक्षा बलों को लगातार सतर्क रहना पड़ रहा है।
पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की पूर्ण तह तक पहुँचने और बाकी बचे सहयोगियों की पहचान करने के लिए अन्वेषण जारी रखे हुए है, ताकि आगे किसी भी तरह के आतंकवादी हमले को रोका जा सके और क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे।



