
केरल में विधानसभा चुनाव 2026 की तारीखें करीब आते ही राजनीतिक गतिविधियाँ तेज़ हो गई हैं और सभी प्रमुख पार्टियाँ अपने उम्मीदवारों की घोषणा की तैयारी में जुट गई हैं। केरल की राजनीति में दोनों राष्ट्रीय दलों ने संकेत दिए हैं कि वे इस महीने के अंत तक अपनी पहली सूची जारी कर सकते हैं, जिससे चुनावी महज़रणी में शुरुआती बढ़त लेने में मदद मिलेगी।
राज्य में इस चुनाव में मुख्य मुकाबला माकपा-नेतृत्व वाले लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) और कांग्रेस-नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) के बीच है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) भी अपनी पैठ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। पिछले स्थानीय निकाय चुनावों में बीजेपी को कुछ सफलता भी मिली थी, खासकर तिरुवनंतपुरम नगर निगम में, जिसने पार्टी को पिछले चुनावों में ना के बराबर समर्थन रखने के बावजूद विश्वास बढ़ाया।
कांग्रेस पार्टी ने चुनाव की तैयारियों में तेजी लाते हुए रमेश चेन्निथला को चुनाव समिति का अध्यक्ष बनाकर और शशि थरूर को प्रचार अभियान समिति में वरिष्ठ भूमिका देकर अभियान को संगठित रूप देने का फैसला किया है। यह संकेत देता है कि पार्टी कांस्टीट्यूएंसी स्तर पर रणनीति को मजबूत करने में लगी है और उम्मीदवारों की पहली सूची इसी दिशा में बड़ा कदम है।
भाजपा की तरफ से भी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का केरल दौरा महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिसमें पार्टी ने उच्च प्राथमिकता वाली सीटों (A1 category) के लिए उम्मीदवार चयन पर विचार किया है। भाजपा के रणनीतिक दृष्टिकोण के अनुसार, कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जहाँ पार्टी को गत स्थानीय चुनावों में मत प्रतिशत में ख़ास बढ़त मिली थी और वे इन सीटों को इस बार जीत के लक्ष्य के रूप में देख रहे हैं।
वहीं राज्य के वर्तमान मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन और सरकार ने चुनावी समीकरणों को लेकर आलोचनाओं का सामना भी किया है। विजयन ने हाल ही में आरोप लगाया कि भाजपा और UDF मिलकर राज्य के विकास को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। इस बीच कांग्रेस अपनी चार्जशीट बरक़रार रख रही है और विधानसभा चुनाव में अपने प्रदर्शन को सुधारने की कोशिश कर रही है।
राज्य में आगामी केरल विधानसभा चुनाव 2026 में कुल 140 सीटों पर मतदान होना निर्धारित है और यह माना जाता है कि चुनाव एक चरण में ही होंगे। पिछले चुनाव में LDF ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया था, जबकि UDF और BJP अपेक्षाकृत पीछे रहे थे। इस बार राजनीतिक फ़ील्ड में बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही LDF को टक्कर देने की तैयारियों में हैं, और उम्मीदवार सूची का समय से पहले जारी होना दलों की रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।



