लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में कथित धर्मांतरण और महिला डॉक्टरों व कर्मचारियों के उत्पीड़न का मामला एक बार फिर चर्चा में है। उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने करीब 10 महीने की जांच के बाद अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। रिपोर्ट में विश्वविद्यालय के अलग-अलग विभागों से जुड़े डॉक्टरों और कर्मचारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। जांच में कुल 12 लोगों को चिह्नित किए जाने की बात सामने आई है।
STF की रिपोर्ट में पैथोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, रेडियोलॉजी और गांधी वार्ड से जुड़े मामलों का उल्लेख है। आरोप है कि कुछ महिला डॉक्टरों, रेजिडेंट डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और संविदा कर्मचारियों को प्रेम संबंध, शादी का झांसा या अन्य तरीकों से प्रभावित कर उन पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया गया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि विरोध करने वाली महिलाओं को मानसिक रूप से परेशान करने और उनका करियर खराब करने की धमकी दिए जाने की शिकायतें मिलीं।
मामले में पैथोलॉजी विभाग के रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. रमीजुद्दीन नायक उर्फ रमीज मलिक का नाम प्रमुखता से सामने आया है। उन पर एक महिला डॉक्टर को शादी का भरोसा देकर शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने, ब्लैकमेल करने और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने के आरोप हैं। इस मामले में उन्हें 9 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया जा चुका है। उनके माता-पिता को भी मामले में सह-आरोपी बनाया गया था।
रिपोर्ट में गांधी वार्ड के नर्सिंग स्टाफ से जुड़े कुछ मामलों का भी जिक्र है। नफीस और फुरकान नाम के कर्मचारियों पर महिला कर्मियों को प्रभावित करने, उनका उत्पीड़न करने और निकाह तथा धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने के आरोप लगाए गए हैं। वहीं, रेजिडेंट डॉक्टर आदिल से जुड़े मामले में भी महिला कर्मचारियों को शादी का झांसा देकर शोषण करने की शिकायतों का उल्लेख किया गया है।
माइक्रोबायोलॉजी विभाग में संविदा कर्मचारी शफात अली खान पर एक महिला कंप्यूटर ऑपरेटर के साथ कथित छेड़छाड़ और निकाह के लिए दबाव बनाने का आरोप है। शिकायत के विरोध के बाद महिला को नौकरी से हटाए जाने का भी दावा किया गया है। रेडियोलॉजी विभाग के रेजिडेंट डॉक्टर रिजवान पर एक छात्रा को ब्लैकमेल करने और धर्म परिवर्तन के लिए उकसाने का आरोप जांच रिपोर्ट में दर्ज होने की बात कही गई है।
STF ने अपनी रिपोर्ट में कुछ वरिष्ठ अधिकारियों और विभागीय फैकल्टी की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि कुछ शिकायतों पर उचित कार्रवाई नहीं की गई और संबंधित लोगों को बचाने की कोशिश हुई। रिपोर्ट में ‘इस्लामिक मेडिकोज’ नाम के समूह का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, किसी संगठन या व्यक्ति की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष संबंधित साक्ष्यों और आगे की कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही तय होगा।
जांच रिपोर्ट मिलने के बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग ने KGMU प्रशासन को पत्र भेजकर चिह्नित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने और उसकी जानकारी शासन को देने के निर्देश दिए हैं। KGMU के मुख्य प्रवक्ता डॉ. केके सिंह के मुताबिक, प्रशासन को रिपोर्ट मिल गई है और उसमें जिन 12 लोगों की पहचान की गई है, उनके खिलाफ रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
अब इस पूरे मामले में शासन और KGMU प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजर है। STF की रिपोर्ट में दर्ज आरोपों की गंभीरता को देखते हुए संस्थान में शिकायतों के निपटारे और महिला कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, रिपोर्ट में नाम आने मात्र से किसी व्यक्ति का अपराध सिद्ध नहीं होता। संबंधित आरोपों पर अंतिम फैसला जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा
