बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और BNP (बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी) की प्रमुख खालिदा जिया के निधन के साथ देश की राजनीति में एक लंबा अध्याय समाप्त हो गया है। खालिदा जिया, जिन्होंने BNP को दशकों तक नेतृत्व दिया, अब नहीं रहीं और उनके जाने से पार्टी की राजनीतिक दिशा में बड़ा बदलाव आने की संभावना जताई जा रही है।
विश्लेषण के अनुसार, खालिदा जिया की राजनीति BNP को एक मौलवादी-राष्ट्रीय विचारधारा के रूप में स्थापित करने की कोशिश थी, जिसमें कट्टरपंथी और इस्लामी विचारों को शामिल करने की प्रवृत्ति रही है। लेकिन अब उनके निधन के बाद BNP को अपनी पहचान और राजनीतिक रणनीति बदलने का दबाव महसूस हो रहा है। ऐसा माना जाता है कि पार्टी अब पहले से कहीं अधिक जमात-ए-इस्लामी के प्रभाव और ताकत के सामने मजबूर हो सकती है, जो अब बांग्लादेश की राजनीति में एक सक्रिय और प्रभावशाली भूमिका निभा रही है।
विश्लेषणकारों का मानना है कि यह सिर्फ एक नेता की मौत नहीं है, बल्कि यह उस विचारधारा के अंत का भी संकेत है जो लंबे समय से BNP के भीतर मौजूद थी। अब जमात-ए-इस्लामी, जिसने 1971 की आज़ादी के समय पाकिस्तान-समर्थक रुख तथा कट्टरपंथी विचारों के लिए आलोचना झेली थी, राजनीतिक परिदृश्य में केंद्रीय शक्ति के रूप में उभर रहा है।
खालिदा जिया के निधन के राजनीतिक प्रभाव और BNP की स्थिति अब आगामी बांग्लादेश आम चुनावों और देश की सेक्युलर बनाम धार्मिक राजनीति के आयामों को प्रभावित कर सकते हैं।
