कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ के बाद आयोजन की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। इस हादसे में 19 लोगों की मौत हुई और कम से कम 25 लोग घायल हुए। घटना के बाद पूजा समिति के पूर्व महासचिव जयंता बनर्जी ने आरोप लगाया कि इस साल आयोजन की जिम्मेदारी और भीड़ संभालने की व्यवस्था में बड़े बदलाव किए गए थे, जिनका असर सुरक्षा पर पड़ा हो सकता है।
जयंता बनर्जी के मुताबिक, वह कई वर्षों से चोरबागान में दुर्गा पूजा के आयोजन से जुड़े रहे थे। उनका दावा है कि पूजा से ठीक पहले उन्हें पद छोड़ने के लिए कहा गया, जबकि पंडाल की तैयारियां शुरू हो चुकी थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि नई समिति में ऐसे लोग शामिल थे, जिन्हें इलाके और आयोजन के संचालन का पर्याप्त अनुभव नहीं था। हालांकि, ये उनके लगाए आरोप हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि जांच के जरिए होनी बाकी है।
पूर्व महासचिव ने सबसे अहम सवाल प्रशिक्षित स्वयंसेवकों की तैनाती को लेकर उठाया। उनका कहना है कि पहले भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अनुभवी वॉलंटियर्स की टीम मौजूद रहती थी, लेकिन इस बार उन्हें जिम्मेदारी नहीं दी गई। उनके अनुसार, बड़े धार्मिक आयोजन में भीड़ की आवाजाही संभालने के लिए स्थानीय परिस्थितियों की जानकारी और प्रशिक्षण बेहद जरूरी होता है।
बनर्जी ने यह भी कहा कि दुर्गा पूजा के दौरान बारिश होना कोई असामान्य बात नहीं है, इसलिए मौसम को ही हादसे की एकमात्र वजह नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने आयोजन की तैयारियों और प्रबंधन में कमियां होने का आरोप लगाया, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि वह इस साल की व्यवस्था का हिस्सा नहीं थे और उन्हें ठीक-ठीक जानकारी नहीं है कि किस स्तर पर चूक हुई।
हादसे के समय पंडाल के आसपास बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। शुरुआती जानकारी और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के अनुसार, तेज बारिश, संकरी गलियों और प्रवेश तथा निकास के रास्तों पर भीड़ जमा होने से अफरा-तफरी बढ़ी। कुछ लोगों ने रोशनी और पुलिस तथा स्वयंसेवकों की मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठाए हैं। पुलिस इन परिस्थितियों और भीड़ के अचानक बढ़ने की वजहों की जांच कर रही है।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि भीड़ को दिशा देने के लिए की गई घोषणाओं या प्रवेश-निकास से जुड़े निर्देशों में किसी तरह की गड़बड़ी तो नहीं हुई। शुरुआती रिपोर्टों में गलतफहमी पैदा करने वाली घोषणा और निजी सुरक्षा कर्मियों की सीटी बजाने जैसी बातों का जिक्र है, लेकिन हादसे के कारणों और जिम्मेदारी को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
घटना के बाद प्रशासन ने मामले की जांच तेज कर दी है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने सात लोगों को गिरफ्तार किया है और राज्य सरकार ने हादसे की परिस्थितियों तथा संभावित सुरक्षा चूकों की जांच के लिए विशेष जांच दल गठित किया है। अधिकारियों ने कहा है कि आयोजन समिति, सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण से जुड़े पहलुओं की पड़ताल की जाएगी।
चोरबागान हादसे ने एक बार फिर बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन, प्रशिक्षित स्वयंसेवकों की तैनाती, पर्याप्त निकास मार्ग, रोशनी और आपातकालीन प्रतिक्रिया की अहमियत को सामने ला दिया है। अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि कौन-कौन सी व्यवस्थागत कमियां हादसे में योगदान देने वाली थीं और इसके लिए किसकी जिम्मेदारी तय होती है।
