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लेह हिंसा मामले में कांग्रेस के दो पार्षद एवं दो LBA सदस्यों को कोर्ट में सरेंडर के बाद पुलिस हिरासत में भेजा गया

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लद्दाख के लेह में 24 सितंबर को हुई हिंसक घटनाओं के बाद प्रशासन द्वारा कानूनी कार्रवाई तेज कर दी गई है। इस कड़ी में शनिवार को कांग्रेस के दो पार्षद और दो LBA (Leh Bharatiya Association / Leh’s local body association) सदस्य अदालत में सरेंडर हुए, जिसके बाद उन्हें पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।

इन चारों में से एक नाम उल्लेखनीय है — फुंटसोग स्टैनजिन त्सेपाग — जो वायरल हुए एक वीडियो में भी दिखाया गया था कि वह हिंसा के दौरान जनता और सुरक्षा बलों के बीच सक्रिय भूमिका निभा रहा था। साथ ही, दूसरे सदस्यों में समानला दोरजे नोर्बू, LBA उपाध्यक्ष रेगज़िन दोरजे और चेवांग दोरजे शामिल बताए जाते हैं।

सरेंडर और गिरफ्तारी के बाद, स्थानीय अदालत ने इन चार आरोपियों को पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया है। न्यायालय के समक्ष पेशी के दौरान उन्होंने आत्मसमर्पण किया और हिरासत की अवधि निर्धारित की गई।

पिछली हिंसा में, भीड़ ने सरकारी भवनों और पार्टी कार्यालयों को आग लगाने की घटना को अंजाम दिया — जिसमें BJP कार्यालय और लेह हिल काउंसिल सचिवालय भी शामिल थे। सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों और तोड़फोड़ करने वालों को काबू करने के लिए आंसू गैस और फायरिंग का सहारा लिया, जिसमें चार लोग मारे गए और कई घायल हुए। घटना के बाद लेह इलाके में कर्फ्यू लागू किया गया, और सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई।

घटना को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हैं। बीजेपी ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस पार्षदों ने हिंसा भड़काने में सक्रिय भूमिका निभाई, जबकि कांग्रेस ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि जो व्यक्ति वीडियो में दिखाया गया है, वह पार्षद नहीं है और उसकी पहचान गलत प्रस्तुत की गई।

स्थानीय नेताओं और समाजिक संगठनों ने पुलिस कार्रवाई में निःसंकोच होने की चेतावनी दी है और न्यायोचित, निष्पक्ष जांच की मांग की है। लेह के प्रशासन एवं सुरक्षा एजेंसियों को दबाव बढ़ गया है कि वे ऐसे तर्क पर काम करें कि आत्मसमर्पण करने वालों की कार्यवाही पारदर्शी हो और उनका न्याय हो।

इस मामले की आगे की जांच यह स्पष्ट करेगी कि अपराधों की योजना किसने बनाई, हिंसा को भड़काने में किसका हाथ है, और क्या सुरक्षा बलों के कदमों में कहीं अतिक्रमण या अनुचित कार्रवाई हुई है। साथ ही, न्यायालय द्वारा हिरासत अवधि, जमानत की शर्तें और आरोपियों की सुरक्षा को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय आने की संभावना है।

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