उत्तर प्रदेश के तीर्थ नगरी प्रयागराज में 2026 के लिए माघ मेला का भव्य आयोजन तैयारियाँ जोरों पर हैं। यह धार्मिक-आध्यात्मिक उत्सव 3 जनवरी 2026 से शुरू होकर 15 फरवरी 2026 तक चलेगा — अर्थात् कुल 44 दिन।
इस वर्ष माघ मेला में शामिल प्रमुख स्नान तिथियाँ निम्न हैं:
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3 जनवरी 2026 (पौष पूर्णिमा) — मेला शुभारंभ और कल्पवास की शुरुआत।
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14 जनवरी 2026 (मकर संक्रांति) — पहला शाही स्नान।
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18 जनवरी 2026 (मौनी अमावस्या) — कल्पना है कि यह स्नान सबसे पवित्र स्नानों में से एक होगा।
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23 जनवरी 2026 (बसंत पंचमी) — वसंत के स्वागत का स्नान पर्व।
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1 फरवरी 2026 (माघी पूर्णिमा) — गृहस्थ श्रद्धालुओं के लिए स्नान।
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15 फरवरी 2026 (महाशिवरात्रि) — माघ मेला का समापन शाही स्नान।
क्या है ‘कल्पवास’ और क्यों है यह महत्वपूर्ण
‘कल्पवास’ — मेला का वह हिस्सा जिसमें साधु, संन्यासी, तीर्थयात्री और भक्त संगम की रेती पर एक मास तक निर्वासित होते हैं, साधना, पूजा-पाठ, ध्यान और संयम का पालन करते हैं।
2026 में कल्पवास की अवधि 29 दिनों की बताई गई है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस बार माघ मास की तिथि 29 दिन की है — जो कि पुरुषोत्तम मास के कारण हुआ है।
कल्पवासी इन दिनों साधना, ध्यान, धार्मिक अनुष्ठान, हवन-पूजा आदि कर मन और आत्मा की शुद्धि के लिए प्रयागराज आते हैं। इस प्रकार माघ मेला केवल स्नान-मेला नहीं बल्कि आत्मानुभूति, संस्कार और धार्मिक प्रतिबद्धता का महापर्व है।
माघ मेला — आस्था, श्रद्धा और आध्यात्मिक महत्त्व
त्रिवेणी संगम — जहाँ गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती नदियों का मिलन माना जाता है — पर यह मेला लगता है। हिन्दू धर्मशास्त्रों में इस संगम स्नान को पाप-मुक्ति, आत्म-शुद्धि और मोक्ष की ओर एक पवित्र कदम माना गया है।
भीड़, भक्ति, श्रद्धा, मेल-जोल — माघ मेला एक ऐसी सभा है, जो न सिर्फ धार्मिक आस्था बल्कि सामाजिक-सांस्कृतिक जुड़ाव का भी अवसर देती है। लाखों भक्त, साधु-संन्यासी, कल्पवासी, पर्यटक — सभी मिलकर इस पवित्र आयोजन का हिस्सा बनते हैं।
प्रशासन — तैयारियों में जुटा प्रयागराज
इस बार के माघ मेले के लिए प्रशासन ने पहले से ही तैयारियाँ शुरू कर दी हैं। मेला स्थल पर भूमि आवंटन किया जा रहा है — खासकर पहले दंडी-संन्यासियों को शिविर लगाने के लिए जगह दी जा रही है।
इसके अलावा, भीड़-प्रबंधन, यातायात — बसों, पंटून पुलों, पार्किंग, पानी-बिजली-स्वच्छता आदि व्यवस्थाओं को लेकर विस्तृत योजना बनाई जा रही है, ताकि श्रद्धालुओं को सुखद, सुरक्षित और सुव्यवस्थित अनुभव मिल सके।
