मुंबई — महाराष्ट्र की राजनीति में महाविकास अघाड़ी (MVA) गठबंधन पर एक बड़ा राजनीतिक झटका लगा है, जहाँ कांग्रेस पार्टी ने आगामी बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव में अकेले उतरने का ऐलान किया है, जिससे लंबे समय से अस्तित्व में रहे महा विकास अघाड़ी के अंदर मतभेद और खुलकर सामने आने लगे हैं। कांग्रेस के महाराष्ट्र प्रभारी रमेश चेन्निथला ने स्पष्ट किया कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों में महा विकास अघाड़ी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा गया, लेकिन स्थानीय निकाय चुनाव अलग ढंग से लड़ा जाएगा, और पार्टी 227 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी।
चेन्निथला ने कहा कि स्थानीय निकाय चुनाव जमीन से जुड़े मुद्दों पर आधारित होते हैं और उन्हें जनता के सामने सीधे जवाबदेही के साथ लड़ना होगा, इसलिए कांग्रेस ने यह निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से पार्टी के कार्यकर्ताओं को भी अपनी ताकत को दिखाने का अवसर मिलेगा और स्थानीय नेतृत्व को विकसित करने का मौका मिलेगा। पार्टी ने स्क्रीनिंग कमेटी का गठन भी किया है, जो सभी wards के लिए उम्मीदवारों के चयन का काम करेगी।
कांग्रेस की यह निर्णय घोषणा राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार महा विकास अघाड़ी के भीतर स्पष्ट मतभेद और अंदरूनी खींचतान का संकेत है। पार्टी के भीतर कुछ नेताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि गठबंधन में सीमांत रूप से कांग्रेस के वोटों का लाभ शिवसेना (UBT) को मिलता रहा है, जबकि कांग्रेस की अपनी वोट बैंक और सीटें घटती दिखी हैं, इसलिए इस बार कांग्रेस ने अलग मैदान चुनने का निर्णय लिया है।
बीएमसी चुनाव से पहले ही महा विकास अघाड़ी की कमजोर स्थिति स्पष्ट होती दिख रही है। खबरों के अनुसार, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) और राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) भी मिलकर चुनाव लड़ने की संभावना बना रहे हैं, जिससे विपक्षी मोर्चा और अधिक जटिल होता जा रहा है। कांग्रेस ने पहले ही साफ कहा है कि वह राज ठाकरे के नेतृत्व वाली MNS के साथ गठबंधन नहीं करेगी, जिससे गठबंधन के भीतर असंतुष्ट धारणाएँ और गहरी होती जा रही हैं।
महाराष्ट्र में बीएमसी चुनाव 15 जनवरी 2026 को होने हैं और परिणाम 16 जनवरी को घोषित किए जाएंगे। बीएमसी एशिया का सबसे बड़ा नगर निकाय है, जिसका बजट 74,000 करोड़ रुपये से अधिक है, और इसलिए इन चुनावों को राज्य की राजनीतिक दिशा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कांग्रेस का अकेले लड़ने का निर्णय महा विकास अघाड़ी की राजनीतिक शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है और महा विकास अघाड़ी तथा महायुति दोनों के लिए चुनावी रणनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है। इससे न केवल गठबंधन की ताकत पर असर पड़ेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर वोटरों की पसंद और चुनावी परिणामों पर भी इसका बड़ा प्रभाव देखने को मिल सकता है।
माना जा रहा है कि कांग्रेस इस चुनाव को स्वयं के संगठन और स्थानीय मुद्दों पर मजबूती से सामना करने का मंच बनाएगी, वहीं अन्य विपक्षी दल गठबंधन को सुदृढ़ करने के प्रयास कर रहे हैं। बीएमसी चुनाव की राजनीति अब महाराष्ट्र की सियासी तस्वीर को और अधिक रोचक और जटिल बनाती दिख रही है, जिसमें मुकाबला सिर्फ दो मौजूदा राजनीतिक धड़ों के बीच ही नहीं बल्कि सत्ता में लौटने और स्थानीय नेतृत्व को मजबूत करने के बीच भी लड़ाया जाएगा।
