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ममता बनर्जी का केंद्र पर तीखा हमला, अशुतोष रांका और सौरव दास की रिहाई की मांग; बोलीं- ‘यह स्टेट स्पॉन्सर्ड टेररिज्म’

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पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कॉकroach जनता पार्टी (CJP) के नेताओं अशुतोष रांका और सौरव दास की हिरासत बढ़ाए जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने दोनों नेताओं की तत्काल रिहाई की मांग करते हुए अधिकारियों की कार्रवाई को “स्टेट स्पॉन्सर्ड टेररिज्म” और “पुलिस स्पॉन्सर्ड अत्याचार” करार दिया। ममता ने आरोप लगाया कि युवाओं को निशाना बनाकर लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने की कोशिश की जा रही है।

ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि अशुतोष और सौरव की हिरासत बढ़ाने के पीछे एक मकसद दिखाई देता है और इस तरह की कार्रवाई लोकतंत्र पर हमला है। उन्होंने युवाओं के साथ कथित तौर पर हो रहे उत्पीड़न को रोकने की अपील की और कहा कि देश में अलग-अलग जगहों पर अत्याचार बढ़ने का दावा किया जा रहा है। उन्होंने अपने बयान में स्वतंत्रता संग्राम का भी जिक्र किया और कहा कि पहले भी लोगों ने अत्याचारों का सामना करते हुए संघर्ष जारी रखा था।

यह मामला दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से जुड़ा है। रिपोर्टों के मुताबिक, अशुतोष रांका और सौरव दास उन 14 लोगों में शामिल थे, जिन्होंने कथित तौर पर बैरिकेड पार कर जंतर-मंतर परिसर में प्रवेश किया था। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर नारे लगाए थे। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई जब जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने की खबर सामने आई थी।

दोनों नेताओं को पहले पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। सोमवार को हिरासत की अवधि समाप्त होने पर उन्हें फिर से विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। दिल्ली पुलिस की ओर से आगे पूछताछ के लिए समय मांगे जाने के बाद उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन और बढ़ा दी गई। अब दोनों नेताओं को 21 अक्टूबर तक हिरासत में रहना होगा।

CJP की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने भी हिरासत बढ़ाने के फैसले पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि अभियोजन पक्ष ने अदालत में पर्याप्त कानूनी आधार पेश नहीं किया और कार्यवाही के दौरान दिए गए तर्क अनुमानों पर आधारित थे। उन्होंने दोनों नेताओं को रिहा करने की मांग की है। हालांकि, ये आरोप पार्टी के कानूनी पक्ष की ओर से लगाए गए हैं; हिरासत बढ़ाने का फैसला मजिस्ट्रेट ने किया है।

इस घटनाक्रम ने प्रदर्शन के अधिकार, सार्वजनिक व्यवस्था और कानून के पालन को लेकर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। ममता बनर्जी ने दोनों नेताओं की रिहाई की मांग करते हुए मौजूदा कार्रवाई की आलोचना की है, जबकि पुलिस ने हिरासत बढ़ाने के लिए आगे की पूछताछ की जरूरत बताई थी। मामले में अगली कानूनी कार्रवाई पर अब नजर रहेगी।

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