कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने दुनिया के मौजूदा राजनीतिक हालात पर चिंता जताते हुए इसे ‘दिशाहीन होती दुनिया’ बताया है। उन्होंने इजरायल, अमेरिका और ब्राजील के हालिया चुनावी नतीजों का जिक्र करते हुए कहा कि कई देशों में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। तिवारी के मुताबिक, यूरोप रूस-यूक्रेन युद्ध के गतिरोध से जूझ रहा है, भारत आंतरिक राजनीतिक संघर्ष में उलझा है और चीन लगातार अपनी ताकत बढ़ा रहा है।
मनीष तिवारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी टिप्पणी में इजरायल की राजनीतिक स्थिति को भी दुनिया में बढ़ती अनिश्चितता का उदाहरण बताया। वहां हालिया चुनाव में किसी भी बड़े गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। 120 सदस्यों वाली संसद में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाले गठबंधन को 53 सीटें मिली हैं, जबकि विपक्षी गठबंधन के खाते में 48 सीटें आई हैं। अरब दलों को 19 सीटें मिली हैं। सरकार बनाने के लिए 61 सीटों की जरूरत है, ऐसे में सरकार गठन के लिए दूसरे दलों का समर्थन अहम हो सकता है।
अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को भी बड़ा झटका लगा है। 3 नवंबर को हुए चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों में बहुमत हासिल किया है। इस नतीजे के बाद ट्रंप के लिए अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। चुनाव के दौरान महंगाई, जीवनयापन की बढ़ती लागत, टैरिफ नीतियां और ईरान युद्ध जैसे मुद्दे चर्चा में रहे।
तिवारी ने अमेरिकी चुनाव के नतीजों को इजरायल और अमेरिका की ओर से ईरान के खिलाफ जारी आक्रामकता के संदर्भ में भी देखा। उनकी टिप्पणी के मुताबिक, अमेरिकी चुनाव परिणामों से पश्चिम एशिया की राजनीति और क्षेत्रीय तनाव पर असर पड़ने की संभावना पर चर्चा तेज हो सकती है। हालांकि, चुनावी नतीजों के आधार पर किसी सैन्य या विदेश नीति में बदलाव को निश्चित नहीं माना जा सकता।
ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा की दोबारा जीत का भी मनीष तिवारी ने उल्लेख किया। ब्राजील में 25 अक्टूबर को हुए दूसरे दौर के चुनाव में लूला को 51.79 प्रतिशत वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी फ्लावियो बोल्सोनारो को 48.21 प्रतिशत मत हासिल हुए। तिवारी ने इस जीत को दक्षिण अमेरिका में दक्षिणपंथी राजनीति के बढ़ते प्रभाव के बीच एक अहम राजनीतिक घटनाक्रम के रूप में देखा।
कांग्रेस सांसद ने यूरोप की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए रूस और यूक्रेन के बीच लंबे समय से जारी युद्ध के गतिरोध तथा उससे पैदा हो रहे असंतोष का जिक्र किया। उनका कहना है कि दुनिया के कई हिस्सों में राजनीतिक और रणनीतिक अनिश्चितता बनी हुई है। वहीं, चीन अपनी आर्थिक और सामरिक क्षमताओं को धीरे-धीरे मजबूत कर रहा है, जबकि भारत घरेलू राजनीतिक संघर्षों में उलझा हुआ है।
मनीष तिवारी की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब अमेरिका, इजरायल और ब्राजील के चुनावी घटनाक्रम के बाद वैश्विक राजनीति में नए समीकरणों पर चर्चा हो रही है। उनके बयान का मुख्य संदेश यह है कि अलग-अलग देशों में सत्ता और राजनीतिक संतुलन में बदलाव का असर अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। हालांकि, इन चुनावी नतीजों का भारत की विदेश नीति और वैश्विक संबंधों पर कितना असर पड़ेगा, यह आने वाले समय में संबंधित देशों के फैसलों और कूटनीतिक घटनाक्रमों से स्पष्ट होगा।
