
मोदी सरकार 2025 के संसद के शीतकालीन सत्र में कई बड़े आर्थिक और प्रशासनिक सुधार पेश करने की तैयारी कर रही है। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, बिहार चुनाव में बड़ी जीत के बाद केंद्र सरकार अब उन सुधारों को तेज़ी से आगे बढ़ाने के संकेत दे रही है, जो पिछले कुछ समय से रुके हुए थे।
सरकार पहले ही चार नए लेबर कोड लागू कर चुकी है — वेज कोड, इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड, सोशल सिक्योरिटी कोड और ऑक्युपेशनल सेफ्टी & हेल्थ कोड। इन चारों कोड्स ने देश के 29 पुराने श्रम कानूनों को एकीकृत कर दिया है, जिससे कामगारों को न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा, काम की बेहतर परिस्थितियाँ और ओवरटाइम भुगतान जैसी सुविधाएँ मजबूत होंगी।
इन सुधारों का प्रभाव देश के 50 करोड़ से अधिक श्रमिकों पर पड़ेगा, खासकर असंगठित क्षेत्र, कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स और गिग-वर्कर्स पर। सरकार का मानना है कि एकीकृत श्रम कानूनों से रोजगार, निवेश और औद्योगिक माहौल में सुधार आएगा—जिससे “Ease of Doing Business” और उत्पादन बढ़ेगा।
NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, श्रम सुधारों के बाद केंद्र सरकार अब पूंजी बाजार, व्यापार, उद्योग, कर-व्यवस्था और प्रशासनिक ढांचे से जुड़े कई और अहम विधेयक शीतकालीन सत्र में पेश करने की तैयारी कर रही है। संभावित कानूनों में Securities Market Code जैसा बड़ा एकीकृत बाज़ार कानून भी शामिल हो सकता है, जिसके तहत सेबी, डिपॉज़िटरीज़ और ट्रेडिंग कानूनों को एक ढांचे में लाया जाएगा।
इन सुधारों का लक्ष्य सिर्फ आर्थिक विकास बढ़ाना ही नहीं बल्कि देश के नियामक ढांचे को सरल और आधुनिक बनाना है। यह भी माना जा रहा है कि सरकार अपने बजट से पहले इन सुधारों को गति देकर आर्थिक मोर्चे पर मज़बूत संदेश देना चाहती है।



