आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की कूटनीति और निवेश रणनीति चर्चा में है क्योंकि नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ दोनों ही अलग-अलग देशों के दौरे पर हैं, जिनका एजेंडा अलग-अलग लेकिन समान रूप से महत्वपूर्ण है।
पीएम मोदी का इज़राइल दौरा
• प्रधानमंत्री मोदी इज़राइल के दो-दिवसीय आधिकारिक दौरे पर हैं, जहाँ वे रक्षा, सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूती देने के लिए स्थानीय नेतृत्व से बातचीत कर रहे हैं।
• यह मोदी का इज़राइल का दूसरा आधिकारिक दौरा है और इसके दौरान दोनों देशों के बीच “विशेष रणनीतिक साझेदारी” तक रिश्ते को उन्नत करने की चर्चाएँ भी चल रही हैं।
• दौरे में संयुक्त रक्षा प्रौद्योगिकी, सुरक्षा सहयोग, AI और क्वांटम टेक्नॉलजी जैसे क्षेत्रों पर भी समझौता वार्ता होने की संभावना जताई जा रही है।
सीएम योगी का सिंगापुर-जापान निवेश अभियान
• इसी समय, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चार-दिवसीय विदेश दौरे पर हैं, जिनमें उन्होंने पहले सिंगापुर का दौरा किया और अब जापान पहुँच गए हैं।
• सिंगापुर में योगी आदित्यनाथ ने वैश्विक निवेशकों और सरकारी प्रतिनिधियों से बातचीत की, और लगभग ₹1 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव (investment proposals) तथा करीब ₹60,000 करोड़ के MoU साइन किए जाने की रिपोर्टें आई हैं।
• निवेश चर्चा में डेटा सेंटर्स, लॉजिस्टिक्स, रिन्यूएबल एनर्जी, औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सेक्टर शामिल रहे और राज्य को $1 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य पर जोर दिया गया।
• योगी आदित्यनाथ अब जापान की राजधानी टोक्यो में हैं, जहाँ उनका स्वागत हुआ और वे स्थानीय उद्योग प्रतिनिधियों तथा व्यवसायिक समूहों के साथ निवेश और विकास सहयोग पर संवाद करेंगे।
क्यों हैं ये यात्राएँ महत्वपूर्ण?
रक्षा और कूटनीति: मोदी का इज़राइल दौरा भारत-इज़राइल के संबंधों को रणनीतिक गहराई देने और सुरक्षा साझेदारी को अगले स्तर पर ले जाने का संकेत देता है।
आर्थिक कूटनीति: योगी का सिंगापुर-जापान दौरा व्यापार और निवेश आकर्षण के लिये है, खासकर उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य के वैश्विक निवेश हित में पहल को आगे बढ़ाने के लिए।
