महाराष्ट्र के नागपुर में पानी की कमी की आशंका के बीच महानगरपालिका ने करीब 900 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली 265 सीमेंट सड़कों के निर्माण कार्य को फिलहाल स्थगित कर दिया है। पांचवें चरण की इस परियोजना के तहत शहर में कुल 89.22 किलोमीटर लंबी सड़कों का कंक्रीटीकरण किया जाना था। प्रशासन ने पानी की उपलब्धता को देखते हुए विकास कार्यों के बजाय पीने के पानी को प्राथमिकता देने का फैसला किया है।
इस परियोजना के तहत शुरुआत में 135 सड़कों को सीमेंट-कंक्रीट से बनाने की योजना थी। बाद में स्थानीय विधायकों और नगरसेवकों से मिले प्रस्तावों के बाद सड़कों की संख्या बढ़ाकर 265 कर दी गई। अब पानी की कमी की आशंका के कारण इस बड़े प्रोजेक्ट को आगे के लिए टाल दिया गया है। हालांकि, काम दोबारा कब शुरू होगा, इसकी निश्चित तारीख फिलहाल सामने नहीं आई है।
महानगरपालिका के इस फैसले की मुख्य वजह सीमेंट-कंक्रीट की सड़कें बनाने में पानी की अधिक खपत है। निर्माण के दौरान कंक्रीट तैयार करने के अलावा सड़क को मजबूत बनाने के लिए उसकी तराई भी करनी पड़ती है। ऐसे में प्रशासन उपलब्ध पानी को निर्माण कार्यों में खर्च करने के बजाय लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों के लिए बचाना चाहता है।
नागपुर में इस साल बारिश की कमी और जलाशयों में घटते जलस्तर को लेकर चिंता बढ़ी है। शहर की जलापूर्ति के प्रमुख स्रोतों में शामिल तोतलाडोह बांध में 14 अक्टूबर के आंकड़ों के अनुसार पानी का भंडार उसकी निर्धारित क्षमता का लगभग 45.39 प्रतिशत रह गया था। वहीं, कामठी खैरी जलाशय में भंडारण करीब 71.83 प्रतिशत था। इन आंकड़ों ने आने वाले समय में जल प्रबंधन को लेकर प्रशासन की चिंता बढ़ाई है।
पानी बचाने के लिए प्रतिबंध केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं हैं। महानगरपालिका ने निजी और व्यावसायिक निर्माण कार्यों में पीने के पानी के इस्तेमाल पर भी रोक लगाने का कदम उठाया है। इसके अलावा पार्कों और उद्यानों की सिंचाई के लिए भी पीने के पानी का उपयोग नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन वैकल्पिक जल स्रोतों और उपचारित पानी के इस्तेमाल को बढ़ावा देना चाहता है, ताकि पेयजल की मांग पर दबाव कम किया जा सके।
शहर में पानी की बर्बादी रोकने के लिए अन्य उपायों पर भी काम किया जा रहा है। इनमें वाहन धोने और बागवानी जैसे गैर-जरूरी कामों में पीने के पानी के इस्तेमाल को सीमित करना, पाइपलाइन से होने वाले रिसाव को जल्द ठीक करना और अवैध जल कनेक्शनों पर कार्रवाई करना शामिल है। प्रशासन का उद्देश्य उपलब्ध पानी का बेहतर वितरण सुनिश्चित करना और अनावश्यक खपत को कम करना है।
सड़क निर्माण परियोजना के स्थगित होने से शहर के बुनियादी ढांचे से जुड़े कामों की गति प्रभावित हो सकती है। दूसरी ओर, पानी की कमी के दौरान निर्माण कार्यों को जारी रखने से जलापूर्ति पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका भी है। ऐसे में महानगरपालिका के सामने विकास कार्यों और जरूरी नागरिक सुविधाओं के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है।
फिलहाल 265 सीमेंट सड़कों का काम रोकने का फैसला पानी बचाने की प्राथमिकता को दर्शाता है। परियोजना कब फिर शुरू होगी, यह आने वाले दिनों में बारिश, जलाशयों के स्तर और शहर की जलापूर्ति की स्थिति पर निर्भर करेगा। प्रशासन के लिए सबसे अहम चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि नागपुर के लोगों को पीने का पर्याप्त पानी मिलता रहे और उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल जरूरत के अनुसार किया जाए।
