प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2023 के ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान आयोजित सामुदायिक कार्यक्रम को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस छिड़ गई है। हाल ही में कुछ रिपोर्टों और सोशल मीडिया पोस्ट में यह दावा किया गया कि सिडनी में आयोजित कार्यक्रम में भीड़ जुटाने के लिए लोगों को भुगतान किया गया था। हालांकि, ऑस्ट्रेलिया के भारतीय समुदाय के कई प्रमुख संगठनों और कार्यक्रम से जुड़े प्रतिनिधियों ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए इन्हें निराधार और भ्रामक बताया है। उनका कहना है कि कार्यक्रम में शामिल होने वाले हजारों लोग अपनी इच्छा से पहुंचे थे और किसी भी व्यक्ति को उपस्थिति के बदले भुगतान नहीं किया गया था।
भारतीय समुदाय के नेताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी का दौरा ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर था। इस कारण बड़ी संख्या में लोगों ने स्वेच्छा से कार्यक्रम में हिस्सा लिया। आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम में प्रवेश के लिए पहले से पंजीकरण की व्यवस्था की गई थी और सुरक्षा कारणों से सीमित संख्या में लोगों को ही अनुमति दी गई थी। उनका कहना है कि आयोजन पूरी तरह सामुदायिक सहयोग और स्वयंसेवकों की मदद से संपन्न हुआ था तथा भीड़ जुटाने के लिए किसी प्रकार की भुगतान व्यवस्था नहीं की गई थी।
आरोपों के सामने आने के बाद कई भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई संगठनों ने संयुक्त रूप से बयान जारी कर कहा कि इस तरह के दावे उन हजारों लोगों की भावना का अपमान हैं, जिन्होंने अपनी इच्छा से कार्यक्रम में भाग लिया था। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोग विभिन्न राज्यों और शहरों से स्वयं पहुंचे थे। कई लोगों ने अपने खर्च पर यात्रा की और इसे भारतीय समुदाय के लिए गर्व का अवसर बताया। संगठनों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आर्थिक प्रलोभन दिए जाने का दावा तथ्यों पर आधारित नहीं है।
सामुदायिक नेताओं ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रमों में विदेशों में रहने वाले भारतीयों की बड़ी संख्या में भागीदारी पहले भी देखने को मिली है। उनका मानना है कि ऐसे आयोजनों में लोगों की मौजूदगी को केवल राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि प्रवासी भारतीय अपने देश और संस्कृति से जुड़े कार्यक्रमों में स्वाभाविक रूप से रुचि लेते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के आरोपों से समुदाय की छवि प्रभावित होती है और बिना ठोस साक्ष्य के ऐसे दावे नहीं किए जाने चाहिए।
इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। कुछ विपक्षी नेताओं और आलोचकों ने कार्यक्रम के आयोजन और भीड़ जुटाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं, जबकि समर्थकों का कहना है कि इस तरह के आरोप राजनीतिक उद्देश्य से लगाए जा रहे हैं। फिलहाल इन दावों के समर्थन में कोई आधिकारिक जांच या ऐसा प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया गया है, जिससे यह सिद्ध हो सके कि कार्यक्रम में लोगों को भुगतान कर बुलाया गया था। इसी कारण भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों ने अपुष्ट दावों से बचने और केवल सत्यापित तथ्यों के आधार पर चर्चा करने की अपील की है।
विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशों में किसी भी बड़े राजनीतिक या सामुदायिक कार्यक्रम को लेकर सोशल मीडिया पर कई बार भ्रामक दावे तेजी से फैल जाते हैं। ऐसे मामलों में आधिकारिक दस्तावेज, आयोजकों के रिकॉर्ड और विश्वसनीय साक्ष्यों के आधार पर ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित होता है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रवासी भारतीय समुदाय दुनिया के कई देशों में बड़ी संख्या में रहता है और भारतीय नेताओं के दौरे के दौरान बड़ी सभाएं होना कोई नई बात नहीं है।
फिलहाल ऑस्ट्रेलिया में भारतीय समुदाय के संगठनों ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रधानमंत्री मोदी के सिडनी कार्यक्रम में शामिल लोगों को भुगतान किए जाने का दावा सही नहीं है। उनका कहना है कि यह आयोजन भारतीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी और स्वयंसेवकों के सहयोग से सफल हुआ था। वहीं, इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले दावों की सत्यता जांचे बिना उन्हें तथ्य के रूप में स्वीकार करना कितना उचित है
