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NCERT के कक्षा 9 के नए सिलेबस में चुनाव आयोग और SIR को मिली जगह, अब छात्र समझेंगे लोकतांत्रिक चुनाव प्रक्रिया

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राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 9 के सामाजिक विज्ञान पाठ्यक्रम में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए चुनाव आयोग (Election Commission) और विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) से जुड़े विषयों को शामिल किया है। नए पाठ्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित रखने के बजाय भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था, चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची तैयार करने की प्रणाली की व्यावहारिक समझ देना है। यह बदलाव नई शिक्षा नीति (NEP) और अनुभव आधारित शिक्षा की अवधारणा के अनुरूप माना जा रहा है।

नए अध्याय में छात्रों को यह बताया जाएगा कि भारत में चुनाव कैसे कराए जाते हैं, चुनाव आयोग की संवैधानिक भूमिका क्या है, मतदाता सूची तैयार करने और उसे समय-समय पर अपडेट करने की प्रक्रिया कैसे संचालित होती है तथा स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए किन व्यवस्थाओं का पालन किया जाता है। पाठ्यक्रम में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया को भी उदाहरण के रूप में शामिल किया गया है, ताकि विद्यार्थी समझ सकें कि मतदाता सूची को सटीक और अद्यतन बनाए रखने के लिए किस प्रकार का प्रशासनिक कार्य किया जाता है।

एनसीईआरटी का मानना है कि लोकतंत्र की मजबूत नींव नागरिकों की जागरूकता पर आधारित होती है। इसी सोच के तहत पाठ्यपुस्तक में चुनावी साक्षरता (Electoral Literacy) को विशेष महत्व दिया गया है। विद्यार्थियों को मतदान के अधिकार, नागरिक जिम्मेदारियों, पारदर्शी चुनाव व्यवस्था और लोकतांत्रिक संस्थाओं के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाएगी। इससे कम उम्र में ही छात्रों में लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति समझ विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।

नई सामाजिक विज्ञान पुस्तक में केवल चुनावी प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की कार्यप्रणाली, संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका और नागरिक भागीदारी जैसे विषयों को भी अधिक व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत किया गया है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इससे विद्यार्थियों को किताबों से बाहर निकलकर वास्तविक प्रशासनिक और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को समझने का अवसर मिलेगा। साथ ही आलोचनात्मक सोच, विश्लेषण क्षमता और जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में भी यह बदलाव उपयोगी साबित हो सकता है।

हालांकि पाठ्यक्रम में इस बदलाव को लेकर राजनीतिक और शैक्षणिक स्तर पर चर्चा भी शुरू हो गई है। कुछ विशेषज्ञ इसे छात्रों को लोकतांत्रिक व्यवस्था से जोड़ने की सकारात्मक पहल मान रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि पाठ्यपुस्तकों में समकालीन विषयों को शामिल करते समय संतुलित और तथ्यपरक प्रस्तुति सुनिश्चित की जानी चाहिए। इसके बावजूद एनसीईआरटी का कहना है कि पाठ्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं, चुनावी प्रक्रियाओं और नागरिक कर्तव्यों के बारे में व्यवहारिक एवं तथ्य आधारित जानकारी उपलब्ध कराना है।

शिक्षाविदों के अनुसार आने वाले समय में इस तरह के विषय छात्रों को न केवल परीक्षाओं के लिए बल्कि एक जागरूक नागरिक के रूप में भी तैयार करेंगे। नई पीढ़ी यदि लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली और चुनावी व्यवस्था को विद्यालय स्तर पर ही समझेगी, तो भविष्य में उसकी लोकतांत्रिक भागीदारी और नागरिक जिम्मेदारी दोनों अधिक मजबूत हो सकती हैं।

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