देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 को लेकर छात्रों और अभिभावकों की चिंताओं के बीच बिहार से एक बड़ा खुलासा सामने आया है। मुजफ्फरपुर पुलिस ने ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है जो सोशल मीडिया और खासतौर पर टेलीग्राम के जरिए NEET समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं के कथित ‘असली प्रश्नपत्र’ बेचने का दावा कर रहा था। इस मामले में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन पर छात्रों और उनके परिवारों से मोटी रकम वसूलकर फर्जी प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का आरोप है।
जांच के दौरान सामने आया कि आरोपियों ने टेलीग्राम पर कई समूह और चैनल बना रखे थे, जहां परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक होने का दावा किया जाता था। छात्रों को विश्वास दिलाने के लिए पुराने प्रश्नपत्र, प्रिंटेड दस्तावेज और कथित ‘प्रूफ’ साझा किए जाते थे। इसके बाद इच्छुक अभ्यर्थियों से ऑनलाइन भुगतान लेकर उन्हें फर्जी सामग्री भेजी जाती थी। पुलिस का कहना है कि गिरोह का मुख्य उद्देश्य परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों की बेचैनी और सफलता की चाह का फायदा उठाकर आर्थिक ठगी करना था।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तार किए गए आरोपियों के पास से मोबाइल फोन और डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए हैं। शुरुआती जांच में पता चला है कि यह नेटवर्क सोशल मीडिया के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच बना चुका था। मामले की जांच अब इस दिशा में भी की जा रही है कि क्या गिरोह का संबंध अन्य राज्यों में सक्रिय इसी तरह के नेटवर्क से है या नहीं। अधिकारियों को संदेह है कि इस रैकेट के पीछे और भी लोग शामिल हो सकते हैं।
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब NEET 2026 को लेकर पेपर लीक और फर्जी प्रश्नपत्रों की अफवाहें लगातार सोशल मीडिया पर फैल रही हैं। हाल के दिनों में टेलीग्राम पर कई ऐसे ग्रुप्स की जानकारी सामने आई थी जो परीक्षा का प्रश्नपत्र पहले से उपलब्ध कराने का दावा कर रहे थे और छात्रों से हजारों रुपये एडवांस मांग रहे थे। हालांकि जांच एजेंसियों और परीक्षा अधिकारियों ने बार-बार छात्रों को ऐसे दावों से सावधान रहने की सलाह दी है।
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि हर वर्ष परीक्षा के दौरान कुछ असामाजिक तत्व छात्रों की मानसिक स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। मेडिकल कॉलेज में दाखिले की कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण कई छात्र ऐसे झांसे में आ जाते हैं। विशेषज्ञों ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे किसी भी अनधिकृत स्रोत से प्रश्नपत्र खरीदने या पेपर लीक के दावों पर भरोसा न करें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही विश्वास करें।
बिहार पुलिस की इस कार्रवाई को परीक्षा से जुड़े साइबर अपराधों के खिलाफ एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए फैलाए जा रहे ऐसे फर्जीवाड़ों पर लगातार नजर रखी जा रही है। आने वाले दिनों में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं। फिलहाल जांच एजेंसियां इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर यह नेटवर्क कितने समय से सक्रिय था और कितने छात्रों को अपना शिकार बना चुका है।
