देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 को लेकर जारी विवाद और री-एग्जाम की तैयारियों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान सोमवार को एनडीए (NDA) मुख्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने परीक्षा से जुड़े मुद्दों, छात्रों की प्रतिक्रिया, विभिन्न सर्वे रिपोर्टों और आगामी री-एग्जाम की तैयारियों पर वरिष्ठ नेताओं के साथ चर्चा की। माना जा रहा है कि यह बैठक ऐसे समय हुई है जब NEET परीक्षा को लेकर देशभर में राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज है।
सूत्रों के अनुसार बैठक में NEET-UG 2026 की मौजूदा स्थिति, परीक्षा प्रणाली में सुधार और छात्रों के बीच पैदा हुए विश्वास संकट पर विस्तार से चर्चा हुई। हाल के दिनों में परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक विवाद के बाद सरकार पर लगातार दबाव बना हुआ है। विपक्षी दलों के साथ-साथ कई छात्र संगठनों ने भी परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग उठाई है।
बताया जा रहा है कि NDA नेतृत्व के सामने प्रस्तुत किए गए फीडबैक में छात्रों और अभिभावकों की चिंताओं को प्रमुखता से रखा गया। विभिन्न सर्वेक्षणों और जनमत रिपोर्टों में परीक्षा प्रबंधन को लेकर असंतोष सामने आया है। इसी कारण सरकार अब यह सुनिश्चित करने में जुटी है कि री-एग्जाम पूरी तरह निष्पक्ष, सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से आयोजित हो ताकि छात्रों का विश्वास दोबारा स्थापित किया जा सके।
धर्मेंद्र प्रधान पहले भी कई उच्चस्तरीय बैठकों के माध्यम से NEET री-एग्जाम की तैयारियों की समीक्षा कर चुके हैं। शिक्षा मंत्रालय, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA), सुरक्षा एजेंसियों और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ लगातार समन्वय बैठकों का आयोजन किया जा रहा है। सरकार का दावा है कि इस बार परीक्षा सुरक्षा को अभूतपूर्व स्तर तक मजबूत किया गया है।
री-एग्जाम 21 जून को आयोजित किया जाना है और इसके लिए देशभर में हजारों परीक्षा केंद्र तैयार किए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार प्रश्नपत्र तैयार करने वाले विशेषज्ञों को विशेष सुरक्षा व्यवस्था के तहत अलग रखा गया है। साथ ही प्रश्नपत्रों की छपाई, परिवहन और वितरण की पूरी प्रक्रिया पर बहुस्तरीय निगरानी रखी जा रही है ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना समाप्त की जा सके।
केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों को भी विशेष जिम्मेदारियां सौंपी हैं। शिक्षा मंत्री ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों तथा प्रशासकों को पत्र लिखकर परीक्षा के शांतिपूर्ण और सुरक्षित आयोजन में सहयोग देने का अनुरोध किया है। परीक्षा केंद्रों पर पेयजल, बिजली, चिकित्सा सहायता और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है, खासकर गर्मी के मौसम को ध्यान में रखते हुए।
इस बार परीक्षा सुरक्षा में आधुनिक तकनीक का भी व्यापक उपयोग किया जा रहा है। निगरानी प्रणाली को मजबूत करने, डिजिटल ट्रैकिंग और संवेदनशील केंद्रों पर अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था लागू करने जैसे कदम उठाए गए हैं। सरकार का कहना है कि किसी भी तरह की लापरवाही या परीक्षा में हस्तक्षेप को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
NEET विवाद के कारण राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आई है। इसी वजह से परीक्षा सुधारों को लेकर कई महत्वपूर्ण सुझावों पर काम चल रहा है। शिक्षा मंत्रालय पहले ही संकेत दे चुका है कि भविष्य में NEET परीक्षा को कंप्यूटर आधारित प्रणाली (CBT Mode) में स्थानांतरित किया जा सकता है ताकि सुरक्षा और पारदर्शिता को और मजबूत किया जा सके।
राजनीतिक दृष्टि से भी यह मुद्दा बेहद संवेदनशील बन चुका है। विपक्ष लगातार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है और परीक्षा प्रणाली को सुधारने के लिए व्यापक कदम उठाए गए हैं। इस बीच NDA मुख्यालय में हुई बैठक को आगामी रणनीति तय करने और छात्रों के बीच भरोसा बहाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।
फिलहाल लाखों छात्र 21 जून को होने वाली री-NEET परीक्षा की तैयारी में जुटे हैं। सरकार और परीक्षा एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इस बार परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष और विवाद-मुक्त तरीके से संपन्न हो। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि सरकार द्वारा किए गए सुरक्षा इंतजाम और सुधारात्मक कदम छात्रों का भरोसा जीतने में कितने सफल साबित होते हैं।
