नेपाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिला है, जहां हाल ही में नियुक्त गृह मंत्री सुदान गुरुङ ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। यह इस्तीफा ऐसे समय आया है जब देश में नई सरकार बने अभी एक महीना भी पूरा नहीं हुआ है और प्रधानमंत्री बालेन शाह के नेतृत्व वाली सरकार लगातार विवादों और जनदबाव का सामना कर रही है। बताया जा रहा है कि गुरुङ पर वित्तीय अनियमितताओं और संदिग्ध निवेश से जुड़े आरोप लगे थे, जिसके चलते विपक्षी दलों के साथ-साथ आम जनता और खासकर ‘Gen Z आंदोलन’ से जुड़े युवाओं ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया था।
दरअसल, नेपाल में हाल के वर्षों में युवाओं का प्रभाव तेजी से बढ़ा है और 2025 के ‘Gen Z’ आंदोलन ने देश की राजनीति को पूरी तरह बदलकर रख दिया। इसी आंदोलन की लहर पर सवार होकर बालेन शाह की पार्टी सत्ता में आई थी, जिसने भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़े कदम उठाने और पारदर्शी शासन का वादा किया था। लेकिन सत्ता में आने के कुछ ही दिनों बाद सरकार के एक प्रमुख मंत्री पर लगे आरोपों ने उसकी छवि को झटका दिया। गुरुङ के खिलाफ कथित वित्तीय गड़बड़ियों और संदिग्ध कारोबारी संबंधों की बातें सामने आने लगीं, जिसके बाद विरोध तेज हो गया।
सूत्रों के मुताबिक, बढ़ते विवाद और पार्टी के भीतर दबाव के चलते गुरुङ ने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा सौंप दिया। यह भी कहा जा रहा है कि इस फैसले से पहले पार्टी नेतृत्व के साथ उच्च स्तर पर चर्चा हुई थी। इससे पहले भी विपक्षी दलों ने उनके इस्तीफे की मांग की थी और सड़कों पर प्रदर्शन तेज हो गए थे।
गौरतलब है कि सुदान गुरुङ को हाल ही में गृह मंत्री बनाया गया था और शुरुआती दिनों में उन्होंने कुछ सख्त फैसले लेकर सुर्खियां बटोरी थीं, लेकिन जल्द ही वे विवादों में घिर गए। वहीं, ‘Gen Z मूवमेंट’ ने खुलकर उनकी बर्खास्तगी और गिरफ्तारी तक की मांग कर दी थी, जिससे सरकार पर दबाव और बढ़ गया।
इस पूरे घटनाक्रम ने प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। एक तरफ जहां उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ व्यापक जांच अभियान शुरू किया है, वहीं दूसरी ओर अपनी ही कैबिनेट में उठे विवाद ने उनकी साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर सरकार को अपनी विश्वसनीयता बनाए रखनी है तो उसे ऐसे मामलों में त्वरित और सख्त कार्रवाई करनी होगी।
नेपाल की राजनीति इस समय एक संक्रमण काल से गुजर रही है, जहां युवा नेतृत्व, पारदर्शिता की मांग और पुराने राजनीतिक ढांचे के खिलाफ आक्रोश साफ दिखाई दे रहा है। ऐसे में गुरुङ का इस्तीफा सिर्फ एक व्यक्ति का पद छोड़ना नहीं, बल्कि उस बदलती राजनीति का संकेत है जिसमें जनता अब जवाबदेही चाहती है और किसी भी तरह के आरोपों को नजरअंदाज नहीं करती।
