तेल अवीव (इज़राइल) — ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच जारी बड़े सैन्य संघर्ष के बीच इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का खुलकर धन्यवाद किया है। यह बयान आज एक प्रतिष्ठित समाचार चैनल NDTV के साथ खास बातचीत में आया, जिसमें नेतन्याहू ने कहा कि उन्होंने मोदी से फोन पर बात की और उनके समर्थन तथा इज़राइल के साथ खड़े रहने के लिए उनका आभार व्यक्त किया।
नेतन्याहू ने बातचीत में मोदी को अपना “ग्रेट फ्रेंड” (महान मित्र) बताया और कहा कि उन्होंने मोदी से विस्तार से बात की है तथा इज़राइल के प्रति भारत के रुख और समर्थन के लिए उनकी सराहना की। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि भारत के लोगों के लिए इज़राइल में सम्मान और प्यार है और दोनों नेताओं के बीच मजबूत संबंध हैं। हालांकि नेतन्याहू ने बातचीत के विवरण साझा नहीं किए, उन्होंने कहा कि उन्होंने क्षेत्रीय नेताओं से भी संपर्क किया है और कई मोर्चों पर अपने विचार साझा किए हैं।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में तनाव अपने चरम पर पहुंच चुका है और संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर मिलकर सैन्य हमले किए हैं, जिनमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की आशंका जताई जा रही है और प्रत्यक्ष प्रतिक्रिया में ईरान ने इज़राइल तथा अमेरिका पर मिसाइल तथा ड्रोन हमलों की घोषणा की है, जिससे क्षेत्र की स्थिति और भी नाजुक हो गई है।
भारत की भूमिका इस संकट के दौर में कूटनीतिक और संतुलित रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने नेतन्याहू से बातचीत के दौरान क्षेत्र की स्थिति पर चिंता व्यक्त की और कहा कि आम नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, साथ ही संघर्ष को जल्द से जल्द समाप्त करने की जरूरत पर जोर दिया। इस बातचीत के बाद नेतन्याहू की भारत की सराहना ने भारत-इज़राइल संबंधों में एक और सकारात्मक पैरामीटर जोड़ दिया है।
विश्लेषकों के मुताबिक, यह धन्यवाद केवल व्यक्तिगत सम्मान नहीं है, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका और कूटनीतिक संतुलन की क्षमता को भी दर्शाता है। भारत ने न केवल इज़राइल के साथ संवाद कायम रखा है, बल्कि अन्य क्षेत्रीय नेताओं के साथ भी निरंतर संपर्क में है और समाधान की दिशा में काम कर रहा है।
इस बीच क्षेत्र में संघर्ष के कारण विमान सेवाओं पर असर, नागरिकों की सुरक्षा की चिंताएँ और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर संभावित प्रभावों की रिपोर्टें मिल रही हैं, जिससे विश्व समुदाय चिंता में है और कई देश संघर्ष को रोकने तथा बातचीत के रास्ते तलाशने की अपील कर रहे हैं।
यह पूरा घटनाक्रम इस बात को दर्शाता है कि भारत न केवल शांति और सुरक्षा के लिए आवाज उठा रहा है, बल्कि अपने साझेदारों और वैश्विक नेताओं के साथ मजबूत संवाद भी बनाए रख रहा है, जिसका प्रत्यक्ष प्रभाव राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर दिखाई दे रहा है।
