हरियाणा के नूंह जिले के टपकन गांव से एक बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां पिछले पांच वर्षों में 64 लोगों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो चुकी है। इन लगातार हो रही मौतों ने पूरे गांव को भय और असुरक्षा के माहौल में धकेल दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव का लगभग हर परिवार किसी न किसी गंभीर बीमारी की चपेट में है, जिससे स्थिति और भी गंभीर हो गई है।
जानकारी के अनुसार इन मौतों के पीछे अलग-अलग बीमारियां सामने आई हैं, जिनमें कैंसर, टीबी (क्षय रोग), सांस से जुड़ी बीमारियां और हार्ट अटैक प्रमुख हैं। आंकड़ों के मुताबिक 15 लोगों की मौत कैंसर से, 24 लोगों की टीबी से और 25 लोगों की हार्ट अटैक से हुई है। लगातार बढ़ती बीमारियों और मौतों के कारण गांव के लोग बेहद चिंतित हैं और इसे एक बड़े स्वास्थ्य संकट के रूप में देख रहे हैं।
ग्रामीणों ने इन मौतों के लिए गांव में चल रही एक मीट फैक्टरी को जिम्मेदार ठहराया है। उनका आरोप है कि फैक्टरी से निकलने वाला कचरा और गंदगी खुले में फेंकी जा रही है, जिससे हवा, पानी और जमीन तीनों प्रदूषित हो रहे हैं। इसके चलते गांव में बदबू और गंदगी का स्तर इतना बढ़ गया है कि लोगों का सामान्य जीवन भी प्रभावित हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रदूषण के कारण ही बीमारियां तेजी से फैल रही हैं और हालात दिन-ब-दिन बिगड़ते जा रहे हैं।
गांव की सरपंच ने इस गंभीर मामले को प्रशासन के सामने उठाया है और जिला उपायुक्त को मृतकों और बीमार लोगों की सूची सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिससे उनमें आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
हालांकि प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। जिला प्रशासन का कहना है कि अभी तक किसी एक स्पष्ट कारण की पुष्टि नहीं हुई है और मेडिकल टीम पूरे मामले की जांच कर रही है। रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में पर्यावरण प्रदूषण और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर समय रहते इस मामले में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह संकट और गहरा सकता है। फिलहाल पूरे गांव की नजर प्रशासन की जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है, जिससे इस रहस्यमयी बीमारी और लगातार हो रही मौतों का असली कारण सामने आ सके।
