ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो परियोजना के लिए जमीन जुटाने की हरियाणा सरकार की आपसी सहमति से जमीन खरीदने की नीति अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सकी। जमीन मालिकों के साथ कई दौर की बातचीत के बावजूद केवल करीब 5 प्रतिशत मालिक ही जमीन देने के लिए तैयार हुए। इसके बाद सरकार ने अब भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 के तहत जरूरी जमीन का अधिग्रहण करने का फैसला किया है।
गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड (GMRL) करीब 30.5 किलोमीटर लंबी ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो परियोजना पर काम कर रहा है। इस कॉरिडोर को मिलेनियम सिटी सेंटर से डीएलएफ साइबर सिटी तक विकसित किया जाना है। आधिकारिक परियोजना विवरण के मुताबिक स्वीकृत मुख्य कॉरिडोर 28.5 किलोमीटर का है, जिसमें 27 एलिवेटेड स्टेशन और एक डिपो शामिल है। इसका उद्देश्य पुराने और नए गुरुग्राम के बीच कनेक्टिविटी बेहतर करना है।
जमीन से जुड़ी अड़चनें दूर करने के लिए हरियाणा सरकार ने इस साल जनवरी में सीधे बातचीत के जरिए जमीन खरीदने की नीति अधिसूचित की थी। इसके तहत जिला उपायुक्त की अध्यक्षता में समिति बनाई गई थी, जिसे जमीन मालिकों से बातचीत कर आपसी सहमति से जमीन खरीदने की जिम्मेदारी दी गई थी। नीति में 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के तहत मिलने वाले मुआवजे और पुनर्वास लाभों को ध्यान में रखते हुए सीधे खरीद की व्यवस्था की गई थी।
मुख्य सचिव की समीक्षा के दौरान जिला प्रशासन ने बताया कि मेट्रो के पहले चरण और डिपो के निर्माण के लिए कन्हेई, इस्लामपुर और बसई गांवों की कुल करीब 10,883 वर्गमीटर जमीन की आवश्यकता है। इसमें कन्हेई की करीब 534 वर्गमीटर, इस्लामपुर की करीब 8,653 वर्गमीटर और बसई की करीब 1,695 वर्गमीटर जमीन शामिल है। कन्हेई में जरूरी जमीन का एक हिस्सा सेक्टर-44 स्थित फोर्टिस अस्पताल से संबंधित बताया गया है।
जमीन मालिकों के साथ जिला प्रशासन की ओर से तीन दौर की बैठक भी की गई, लेकिन सहमति नहीं बन सकी। रिपोर्ट के मुताबिक केवल करीब 5 प्रतिशत जमीन मालिक ही मौजूदा खरीद नीति के तहत जमीन देने के लिए तैयार हुए, जबकि करीब 95 प्रतिशत ने इस व्यवस्था के तहत जमीन देने से इनकार किया। इसके बाद अधिकारियों ने सरकार के सामने भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का प्रस्ताव रखा।
जमीन मालिकों की ओर से मुआवजे और पुनर्वास को लेकर अलग-अलग मांगें भी रखी गई हैं। इस्लामपुर के कुछ जमीन मालिकों ने जमीन के बदले जमीन या प्रति वर्ग गज तय राशि की मांग की है। कुछ लोगों ने जमीन मालिक के परिवार के सदस्य को GMRL में नौकरी देने की मांग रखी है। बसई के कुछ जमीन मालिकों ने अधिक मुआवजे के साथ पुनर्वास की मांग भी सामने रखी है।
ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो परियोजना के पहले चरण में मिलेनियम सिटी सेंटर से सेक्टर-9 तक निर्माण का टेंडर आवंटित हो चुका है और निर्माण कार्य आगे बढ़ रहा है। दूसरे चरण में सेक्टर-9 से डीएलएफ साइबर सिटी तक मेट्रो का विस्तार होना है, जिसके लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है। परियोजना में सेक्टर-45, साइबर पार्क, सेक्टर-47, सुभाष चौक, सेक्टर-48, हीरो होंडा चौक, सेक्टर-10, सेक्टर-37, बसई, सेक्टर-9, सेक्टर-7, सेक्टर-4, सेक्टर-5, अशोक विहार, पालम विहार और साइबर सिटी समेत कई प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं।
मेट्रो डिपो के लिए भी जमीन से जुड़ी प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। सेक्टर-33 में प्रस्तावित डिपो के लिए बड़ी मात्रा में जमीन की जरूरत है और इस क्षेत्र में निजी जमीन से संबंधित सहमति का मामला भी सामने आया है। हाल की जानकारी के मुताबिक डिपो के लिए जमीन उपलब्ध कराने की दिशा में सरकारी स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ी है, जबकि इस्लामपुर में जमीन मालिकों के साथ मुआवजे को लेकर अभी सहमति नहीं बनने की बात सामने आई है।
परियोजना से जुड़ी दूसरी अड़चनों को दूर करने के लिए भी समयसीमा तय की गई है। अधिकारियों को बिजली के बुनियादी ढांचे, हाईटेंशन तारों, गैस पाइपलाइन और पेयजल लाइन जैसी सुविधाओं को स्थानांतरित करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं कुछ स्थानों पर सड़क, नाले और अन्य बुनियादी ढांचे के काम को भी मेट्रो निर्माण के साथ समन्वयित किया जा रहा है।
ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो परियोजना में अधिकांश जमीन सरकारी होने के बावजूद कुछ निजी संपत्तियों की जरूरत है, जिसकी वजह से जमीन अधिग्रहण परियोजना की महत्वपूर्ण कड़ी बन गया है। अब आपसी सहमति से खरीद की कोशिश सीमित रहने के बाद सरकार ने कानूनी अधिग्रहण प्रक्रिया अपनाने का फैसला किया है। इससे जरूरी जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, हालांकि मुआवजे और जमीन मालिकों से जुड़े मामलों का समाधान परियोजना की गति के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।
