चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ, जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने ऑपरेशन सिंदूर के पीछे की रणनीति का खुलासा करते हुए बताया कि 22 अप्रैल को हुए पहल्गाम आतंकी हमले के एक दिन बाद यानी 23 अप्रैल को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने साफ शब्दों में कह दिया—‘Enough is enough’ या ‘अब बहुत हो गया’। उसी बैठक में तीनों सेवा प्रमुखों को स्वतंत्रता दी गई कि वे निर्णय लें कि अगले कदम क्या होंगे।
इसके बाद सेना ने तुरंत योजना बनाना शुरू किया। 25 अप्रैल तक नॉर्दर्न कमांड ने नौ चिन्हित लक्ष्यों में से सात पर कार्रवाई की, और आतंकी ढांचे को भारी नुकसान पहुँचाया। ऑपरेशन की पहल 7 मई को हुई, जिसमें पाकिस्तान और पीओके में स्थित आतंकवादी ठिकानों पर हवाई और मिसाइल हमले किए गए।
जनरल द्विवेदी ने ऑपरेशन को रणनीतिक रूप से ‘चेस की चाल’ यानी गेम ऑफ चेस कहा, जहां विरोधी की अगली चाल का अंदाज़ लगाना मुश्किल होता है। इस ऑपरेशन को उन्होंने ‘ग्रे ज़ोन’ ऑपरेशन बताया—पारंपरिक युद्ध की स्थिति से भिन्न, लेकिन निर्णायक प्रभाव वाला अभियान।
उन्होंने पाकिस्तान द्वारा अपने मुख्य को फील्ड मार्शल पद देने के निर्णय पर व्यंग्य करते हुए कहा कि “अगर आप किसी पाकिस्तानी से पूछें कि आप हार गए या जीत गए, तो वह कहेगा—‘मेरे चीफ को फील्ड मार्शल बना दिया गया है, ज़रूर जीत हुई है।’” इससे पाकिस्तान की मानसिकता और कथात्मक नियंत्रण की अहमियत उजागर होती है।
इसके अलावा, सरकार ने ऑपरेशन को लेकर एक स्पष्ट संदेश दिया और साथ ही ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे नाम ने पूरे देश में एकता और जोश भरने का काम किया—यह नाम इतना प्रभावशाली था कि पूरे देश ने एक स्वर में पूछा, “आप क्यों रुके?” और वह सवाल पूरी तरह से उत्तर दे दिया गया।
