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पाकिस्तान-अफगानिस्तान संबंधों में गिरावट: TTP हमलों के बाद इस्लामाबाद ने काबुल को चेतावनी दी, “सीमा पार आतंक स्वीकार नहीं”

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पाकिस्तान और अफगानिस्तान के संबंध हाल ही में एक नए राजनीतिक एवं सुरक्षा संकट में प्रवेश कर गए हैं, जिसका मुख्य कारण है पाकिस्तान में बढ़ती टीटीपी (Tehrik-e-Taliban Pakistan) आतंकवादी गतिविधियाँ और अफगानिस्तान से सीमा पार होने वाले हमले। इस्लामाबाद ने काबुल पर दबाव बढ़ाते हुए साफ कर दिया है कि वह आगे सीमा पार आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा। प्रधानमंत्री शह्बाज़ शरीफ ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि अफगान तालिबान सरकार को यह तय करना होगा कि वह पाकिस्तान के साथ रिश्ते रखना चाहता है या टीटीपी का साथ देना चाहता है।


घटना-पृष्ठभूमि


तनाव की तीव्रता और संभावित आगे के कदम

पाकिस्तान की चेतावनी यह है कि यदि अफगान सरकार ने सीमा पार हमलों को नहीं रोका, तो इस्लामाबाद “सीधे कार्रवाई” कर सकता है जो कि हवाई हमलों से लेकर अन्य सैन्य उपायों तक हो सकती है।

दोनों देशों के बीच व्यापार और कूटनीतिक चैनल अब भी खुले हैं, लेकिन भरोसा घटा है। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान से आने-जाने वाले माल एवं आवागमन पर कड़े नियंत्रण लगाए हैं ताकि असमाजिक या आतंकवादी गतिविधियों को सीमित किया जा सके। अफगानिस्तान पर दबाव है कि वो टीटीपी के ठिकानों की जानकारी दे, इसके बंदोबस्त करे और उन तक पहुँच को रोके।

विश्लेषकों का कहना है कि यदि अफगान तालिबान ने टीटीपी के खिलाफ ठोस कदम नहीं उठाये, तो पाकिस्तान की रणनीति और सख्त हो सकती है — जैसे कि सीमा पार गहराई तक हवाई हमले, और अफ़गानी नागरिकों के अधिकारों या आव्रजन नियमों पर और कठोर पहल। इस तरह के कदमों से क्षेत्र में तनाव बढ़ सकता है, और दोनों देशों के बीच विश्वास और बातचीत की संभावनाएँ कम हो सकती हैं।

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