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पाकिस्तान को IMF से 1.2 अरब डॉलर की राहत, लेकिन शर्तों का दबाव बरकरार

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आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी राहत मिली है, जहां International Monetary Fund (IMF) के साथ लगभग 1.2 अरब डॉलर (करीब 10 हजार करोड़ रुपये) के वित्तीय पैकेज पर प्रारंभिक सहमति बन गई है। यह समझौता ‘स्टाफ-लेवल एग्रीमेंट’ के रूप में हुआ है, जो अंतिम मंजूरी के लिए IMF के बोर्ड के पास जाएगा। इस समझौते के तहत पाकिस्तान को 1 अरब डॉलर एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी (EFF) के तहत और लगभग 210 मिलियन डॉलर रेजिलिएंस एंड सस्टेनेबिलिटी फैसिलिटी (RSF) के तहत मिलने की संभावना है।

यह समझौता ऐसे समय पर हुआ है जब पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था आयात पर अत्यधिक निर्भर होने के कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतों और क्षेत्रीय तनाव से प्रभावित हो रही है। IMF ने साफ किया है कि इस फंडिंग के बदले पाकिस्तान को अपनी मौद्रिक नीति सख्त और डेटा-आधारित रखनी होगी, ताकि महंगाई पर नियंत्रण रखा जा सके और विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत हो सके। पाकिस्तान का केंद्रीय बैंक पहले ही ब्याज दर को 10.5% पर स्थिर रख चुका है, जिससे यह संकेत मिलता है कि सरकार आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए कड़े कदम उठा रही है।

इस समझौते के बाद पाकिस्तान को IMF के 7 अरब डॉलर के बड़े कार्यक्रम के तहत कुल सहायता लगभग 4.5 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है, जो देश की डगमगाती अर्थव्यवस्था को सहारा देने में अहम भूमिका निभाएगा। गौरतलब है कि पाकिस्तान लंबे समय से IMF पर निर्भर रहा है और कई बार आर्थिक संकट से उबरने के लिए इस संस्था से कर्ज ले चुका है।

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह राहत अस्थायी है और इसके साथ कड़े आर्थिक सुधारों का दबाव भी जुड़ा हुआ है। पाकिस्तान को टैक्स सुधार, ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव और सरकारी खर्चों पर नियंत्रण जैसे कई कठिन फैसले लेने होंगे। इसके अलावा आम जनता पर महंगाई और आर्थिक नीतियों का असर भी देखने को मिल सकता है, जिससे सामाजिक असंतोष बढ़ने की आशंका बनी रहती है।

कुल मिलाकर, IMF के साथ यह समझौता पाकिस्तान के लिए राहत की सांस जरूर है, लेकिन यह स्पष्ट संकेत भी है कि देश को अपनी आर्थिक नीतियों में दीर्घकालिक सुधार करने होंगे। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि पाकिस्तान इन शर्तों को कितनी प्रभावी तरीके से लागू कर पाता है और क्या वह आर्थिक स्थिरता हासिल कर पाता है या नहीं।

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